
Nag Panchami 2025: नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नागों की पूजा, आस्तीक और राजा जनमेजय से जुड़ी है कथा
संक्षेप: Nag Panchami 2025: नाग पंचमी के दिन नागों की विशेष पूजा अर्चना करना चाहिए। पूजा के लिए घी, खीर और गुग्गल का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कहानी मुनि आस्तीक और राजा जनमेजय से जुड़ी है, यहां पढ़ें पूरी कथा
नाग पंचमी के दिन नागों की विशेष पूजा अर्चना करना चाहिए। पूजा के लिए घी, खीर और गुग्गल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस अपने परिवार के साथ भोजन करना चाहिए । प्रथम मीठा भोजन करना चाहिए और उसके बाद अपने हिसाब से भोजन कर सकते हैं। नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, नागों का इस तिथि से क्यों खास नाता है, यह जानने के लिए आपको नागों से जुड़ी यह कथा पढ़नी चाहिए। इस कथा का वर्णन अग्नि पुराणों में मिलता है।

एक बार राक्षसों और देवताओं ने मिलकर समुद्र का मंथन किया। उस समय समुद्र से अतिशय शेत उच्चैःश्रवा नामका एव अश्च निकला। उसे देखकर नागमाता कद्रू ने अपनी सौत से कहा कि देखो, यह अशेत वर्ण का है, लेकिन इसके बाल काले दिख रहे हे । तब विनता ने कहा कि न तो यह अश्च श्वेत है, न काला है ओर न लाल। यह सुनकर कद्रूः कहा कि मेरे साथ शर्तं लगाओ कि अगर मैं इस अश्ववे बालों को कृष्ण वर्ण का दिखा दूं तो तुम मेरी दास हो जाओगी और अगर नहीं दिखा सकी तो मैं तुम्हारी दासी हो जाऊंगी। विनता ने यह शर्त स्वीकार कर ली। इसके बाद कद्रू ने अपने पुत्र नागों को बुलाकर सारी कहानी सुनाई और पुत्रों से कहा कि तुम अश्च के बाल के समान छोटे हो जाए और उच्चैःश्रवा के शरीर में लिपट जाओ, जिससे यह काले रंग का दिखाई देने लगे और मैं अपनी सोत विनता को जीतकर उसे अपनी दासी बना लूंगी।
माता की इन बातों को सुनकर नागों ने कहा-यह छल तो हम लोग नहीं करेंगे, चाहे तुम्हारी जीत हो या हार । यह सुनकर कद्रू क्रुद्ध होकर कहा-तुमलोग मेरी आज्ञा नहीं मानते हो, इसलिए मैं तुम्हें शाप देती हू कि पाण्डवों के वंश में पैदा हुआ राजा जनमेजय जब सर्प-यज्ञ करेंगे, तब उस यज्ञ में तुम सभी अग्रि में जल जाओगे।
घबराकर नाग वासुकि को साथ में लेकर ब्रह्माजी के पास पहुंचे और ब्रह्माजी को अपना सारी कहानी सुनाई । इस पर ब्रह्माजी ने कहा कि आस्तीक नाम का विख्यात ब्राह्मण होगा, वह जनमेजय के सर्पयज्ञ को रोकेगा ओर तुम लोगों की रक्षा करेगा। यही बात श्रीकृष्ण भगवान् ने भी युधिष्ठिर से कही थी कि आज से सौ वर्ष के बाद सर्पयज्ञ होगा, जिसमें बड़े-बड़े विषधर ओर दुष्ट नाग नष्ट हो जाएंगे। करोड़ों नाग जब अग्रि में दग्ध होने लगेगे, तब आस्तीक नामक ब्राह्मण सर्पयज्ञ रोककर नागों की रक्षा करेगा। ब्रह्माजी ने पंचमी के दिन वर दिया था ओर आस्तीक मुनि ने पंचमी को ही नागों को रक्षा की थी, अतः पंचमी तिथि नागों को बहुत प्रिय है।





