मूलांक 1 वालों को कौन सा रत्न पहनना होगा शुभ? जानिए पहनने की विधि

May 01, 2026 08:31 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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अंक ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को होता है, उनका मूलांक 1 होता है। इस मूलांक का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और ऊर्जा का प्रतीक है।

मूलांक 1 वालों को कौन सा रत्न पहनना होगा शुभ? जानिए पहनने की विधि

अंक ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को होता है, उनका मूलांक 1 होता है। इस मूलांक का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और ऊर्जा का प्रतीक है। इसी वजह से मूलांक 1 वाले लोगों के लिए रत्नों का चयन भी सूर्य के प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसलिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि उनके लिए कौन सा रत्न शुभ रहता है और कौन सा नहीं।

मूलांक 1 के लिए कौन सा रत्न है सबसे शुभ?

मूलांक 1 वाले लोगों के लिए माणिक सबसे शुभ रत्न माना जाता है। यह सूर्य ग्रह का रत्न है और व्यक्ति के आत्मविश्वास, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाता है। जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उनके लिए माणिक विशेष लाभकारी साबित हो सकता है। यह समाज में मान-सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर दिलाने में भी मदद करता है।

माणिक पहनने के फायदे
आत्मविश्वास और मानसिक स्पष्टता में वृद्धि होती है।
निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।
प्रशासन, सरकारी क्षेत्र और राजनीति में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है।

कब और कैसे पहनें?
माणिक रत्न को रविवार के दिन सूर्योदय के समय सोने या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में पहनना शुभ माना जाता है।

कौन सा रत्न नहीं पहनना चाहिए?
मूलांक 1 वालों के लिए नीलम पहनना सही नहीं माना जाता। यह शनि ग्रह का रत्न है, जबकि मूलांक 1 का स्वामी सूर्य होता है। सूर्य और शनि के बीच विरोध होने के कारण नीलम नकारात्मक प्रभाव दे सकता है।

नुकसान

मानसिक तनाव और विवाद बढ़ सकते हैं।

गलत फैसले लेने की स्थिति बन सकती है।

सिरदर्द या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

रिश्तों में तनाव आ सकता है।

इन रत्नों से भी रहें सावधान

गोमेद और लहसुनिया जैसे रत्न भी मूलांक 1 वालों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते, क्योंकि ये राहु-केतु से जुड़े होते हैं और सूर्य के प्रभाव के विपरीत असर डाल सकते हैं।

ध्यान रखें

किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी या अंक ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें, ताकि आपकी कुंडली के अनुसार सही निर्णय लिया जा सके।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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