Quote of the day: ऐसे लोगों को भूलकर भी नहीं देनी चाहिए सलाह, चुप रहने में ही होती है खुद की भलाई
chanakya niti ( आज का सुविचार): आचार्य चाणक्य मनुष्य के जीवन को सरल या आसान बनाने वाली कई नीतियों को वर्णन किया है। इन नीति में उन्होंने बताया है कि व्यक्ति को कि लोगों या परिस्थितियों में मौन रहना ही समझदारी होता है।

Good Morning Quote of the day 3 September 2026 (chanakya niti): आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें अपनाकर जीवन को आसान बनाते हैं। चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में मानव जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया है। चाणक्य नीति में मौन (चुप रहना) को एक बड़ा अस्त्र और आभूषण माना गया है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को बेकार के संकटों से बचने सही समय और सही जगह पर चुप रहना सबसे बड़ी समझदारी है। एक नीति में उन्होंने बताया है कि व्यक्ति को किन लोगों या परिस्थितियों में चुप या मौन रहना अच्छा होता है। चाणक्य का मानना है कि इन लोगों को छोटी सलाह देने से भी खुद की परेशानी बढ़ सकती है। पढ़ें आज की चाणक्य नीति।
1. मूर्खों और अज्ञानियों की सभा में:
चाणक्य के अनुसार जहां लोग ज्ञानी नहीं हों या केवल बहस करने के लिए लोग बैठे हों वहां बोलना अपने ज्ञान का अपमान करना है।
श्लोक:
तावच्च शोभते मूर्खो यावत्किञ्चिन्न भाषते।
विद्वद्भिः सह संसर्गे तावत् मौनं न शोभते॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य नीति के मुताबिक, मूर्ख व्यक्ति तब तक ही सम्मान पाता है, जब तक वह अपना मुंह बंद रखता है। जैसे ही वह बोलता है उसका अज्ञान जग जाहिर हो जाता है। विद्वानों के बीच बिना समझे बोलना अनुचित है, पर मूर्खों के बीच मौन रहना ही अपना शोभा बनाए रखने का एक मात्र उपाय है।
2. मूर्ख शिष्य को उपदेश देना:
चाणक्य कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति को ज्ञान या सलाह नहीं देनी चाहिए जो उसे समझने के योग्य नहीं हो या जो धर्म और सत्य का सम्मान नहीं करता हो।
श्लोक:
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख शिष्य को उपदेश देने, दुष्ट आचरण वाली स्त्री का पालन-पोषण करने और दुखी या नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ बेकार की बहस में उलझने से बुद्धिमान व्यक्ति केवल कष्ट ही पाता है। ऐसी स्थिति में मौन रहना ही उत्तम होता है।
3. जहां आपका अपमान हो रहा हो:
चाणक्य कहते हैं कि जिस सभा या जहां लोग आपकी बात का आदर नहीं करें या आपको केवल नीचा दिखाने के लिए वातावरण बनाया गया हो, वहां अपनी बात रखकर ऊर्जा को बेकार नहीं करना चाहिए।
श्लोक:
मनसा चिन्तितं कार्यं वचसा न प्रकाशयेत्।
मन्त्रेण रक्षयेद्गूढं कार्ये चापि नियोजयेत्॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि अपनी गुप्त योजनाओं और मन में विचार किए गए कार्यों को कभी दूसरों के सामने जाहिर नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसी जगह बोलते हैं, जहां आपका सम्मान नहीं है, तो लोग आपकी योजना को असफल कर सकते हैं। ऐसे जगहों पर शांत और मौन रहकर ही कार्य को सफल बनाना चाहिए।
4. आधी अधूरी जानकारी:
चाणक्य कहते हैं कि जिस विषय या स्थान के बारे में पूर्ण और सत्य जानकारी नहीं पता हो, वहां बोलना हास्यास्पद बना सकता है।
श्लोक:
आत्मच्छिद्रं न पश्यन्ति परच्छिद्रानुसारिणः
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य के अनुसार, जब तक किसी विषय का पूर्ण ज्ञान नहीं हो, तब तक मौन रहना ही समझदारी होती है।
चाणक्य नीति के अनुसार मौन रहने के तीन नियम:
1. चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को क्रोध के समय मौन रहना चाहिए। क्रोध में बोला गया एक भी शब्द जीवन भर के लिए रिश्ते को बिगाड़ सकता है।
2. चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को पारिवारिक विवाद के समय गोपनीय बातों को बाहर वालों के सामने साझा नहीं करना चाहिए।
3. चाणक्य के अनुसार, जब कोई व्यक्ति आपकी या किसी अन्य की निंदा कर रहा हो, तो उसे शांत होकर सुनना चाहिए। उसमें भाग लेना उचित नहीं है।


