गणेश चतुर्थी पर कितने बजे निकलेगा चांद? चांद दिखने पर पढ़ें ये 1 मंत्र

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Moon Rise Time Ganesh Chaturthi chand: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन चंद्रमा दिख जाने पर दोष व कलंक लगता है। जानें, गणेश चतुर्थी पर वर्जित चंद्र दर्शन समय, किस मुहूर्त में मूर्ति स्थापना न करें व चंद्र दर्शन दोष के उपाय-

Moon Rise Time Ganesh Chaturthi chand kab niklega Ganesh Chaturthi 2026 pooja kab na kare
गणेश चतुर्थी पर कब निकलेगा चांद

Moon Rise Time Ganesh Chaturthi : श्री गणेश भगवान की स्थापना 14 सितंबर दिन सोमवार को करना शुभ रहेगा। धर्मसिन्धु के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चांद को देखना अशुभ माना गया है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी को चंद्र के दर्शन करने से दोष और कलंक लगता है। इस साल 14 सितंबर को धूम- धाम के साथ गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। गणेश पुराण के अनुसार, भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन चंद्रमा दिख जाने पर दोष व कलंक लगता है। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी पर वर्जित चंद्र दर्शन की टाइमिंग, किस मुहूर्त में मूर्ति स्थापना न करें व चंद्र दर्शन दोष के उपाय-

गणेश चतुर्थी पर कब निकलेगा चांद, सुबह राहुकाल में न करें गणपति मूर्ति स्थापना

ज्योतिष शास्त्र एवं वैदिक पंचांग के गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि सोमवार की सुबह 07 बजकर 07 मिनट बजे से प्रारम्भ होकर 15 सितंबर मंगलवार को सुबह 07 बजकर 44 मिनट बजे तक रहेगी।

14 सितंबर को मूर्ति स्थापना कब न करें

14 सितंबर को राहुकाल प्रातः 07 बजकर 36 मिनट से प्रातः 09 बजकर 10 मिनट बजे तक है। इस समय में श्री गणेश जी को स्थापित न करें।

गणेश चतुर्थी पर कितने बजे निकलेगा चांद?

दृक पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर वर्जित चन्द्र दर्शन का समय- सुबह 09 बजकर 06 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि - 10 घंटे 58 मिनट्स की है। शहर अनुसार चंद्रोदय व चन्द्रास्त के समय में कुछ अंतर हो सकता है।

चांद दिख जाने पर करें ये उपाय: चांद दिख जाने पर पढ़ें ये 1 मंत्र

अगर भूलकर गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाते हैं तो इस मंत्र का जाप करें।

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से जुड़ी कथा और उपाय

पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा को अपने सौंदर्य पर अभिमान हो गया था और उसने गज बदन गणेश का उपहास किया। अपने तिरस्कार को ताड़कर गणेश जी ने श्राप दिया। उस दिन भाद्र शुक्ल चतुर्थी थी। चंद्रमा ने तत्काल उनसे क्षमा याचना की। जिसके बाद गणेश जी ने कहा मेरा श्राप केवल भाद्र शुक्ल चतुर्थी को विशेष रहेगा। इस दिन जो मेरा पूजन करेगा, उसका मिथ्या कलंक मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण पर भी स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा कलंक लगा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने भी मिथ्या दोष से मुक्ति पाने के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत किया था।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यता, शास्त्रीय मत व हिंदू पंचांग पर आधारित हैं। हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सटीक हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

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सृष्टि चौबे पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। वह ज्योतिष, ग्रह गोचर, राशिफल, नक्षत्र परिवर्तन, अंकज्योतिष, रत्न, और वास्तु से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। पाठक-केंद्रित व आसान भाषा में जानकारी पेश करना इनके लेखन की पहचान है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और उन पर शोध करना इनकी विशेष पसंद है।

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