
Mokshada Ekadashi vrat Katha in hindi: मोक्षदा एकादशी व्रत कथा, पढ़ें पितरों को मुक्ति दिलाने वाली मोक्षदा एकादशी की कथा
इस साल मोक्षदा एकादशी तिथि रविवार रात 9:29 बजे से शुरू होगी। इसका समापन सोमवार को शाम 7 बजे है। उदयातिथि के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार को रखा जाएगा।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। यह एकादशी मोक्ष देने वाली है। इस साल मोक्षदा एकादशी तिथि रविवार रात 9:29 बजे से शुरू होगी। इसका समापन सोमवार को शाम 7 बजे है। उदयातिथि के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन सुबह 8:20 से शाम 7 बजे तक भद्रा भी रहेगी है। सुबह 6:56 से रात 11:18 बजे तक पंचक रहेंगे। वहीं इसके अगले दिन सुबह 6:57 से सुबह 9:03 बजे तक व्रत पारण कर सकेंगे। युधिष्ठिर बोले--देवदेवेश्वर! मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है ? कौन-सी विधि है तथा उसमें किस देवताका पूजन किया जाता है ? यह सब बताइए | श्रीकृष्ण ने कहा- मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में मोक्षदा नामकी एकादशी होती है।
मोक्षदा एकादशी, सब पापों का नाश करनेवाली है। इस दिन तुलसी की मंझरी तथा धूप-दीपादिप से भगवान् दामोदर का पूजन करना चाहिएय | दशमी और एकादशी के नियमका पालन करना उचित है। इस रात नृत्य, गीत जागरण करना चाहिए। जिसके पितर पापवश नीच योनि में पड़े हों, वे इसका पुण्य दान करने से मोक्षको प्राप्त होते हैं। एक समय की बात है चम्पक नगर में वेखानस नामक राजा रहते थे। एक दिन राजा ने सपने में अपने पितरों को नीच योनि में पड़ा हुआ देखा । उन सबको इस अवस्था में देखकर राजा के मन में बड़ा विस्मय हुआ। प्रातःकाल ब्राह्मणों से उन्होंने सपने का सारा हाल कह सुनाया। राजा बोले- मैंने अपने पितरोंको नरक में गिरा देखा है। वे कह रहे थे कि तुम हमारे तनुज हो, इसलिए इस नरक से हमारा उद्धार करो ।' मेरा हृदय रुंधा जा रहा है। कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे पूर्वज तत्काल नरकसे छुटकारा मिल जाए। ब्राह्मण बोले--राजन् यहां से निकट ही पर्वत मुनि का महान् आश्रम है। वे भूत ओर भविष्य के भी ज्ञाता हैं। आप उन्हीं के पास चले जाइए। राजा मुनि के पास गए और प्रणाम कर सब कुछ बताया।
राजा बोले-स्वामिन! आपकी कृपासे मेरे राज्य सकुशल हैं। लेकिन मेंने सपने में देखा है कि मेरे पितर नरक में पड़े हैं; अतः बताइए किस पुण्य के प्रभावसे उनका उनका छुटकारा होगा। राजा की यह बात सुनकर मुनि राजासे बोले-महाराज ! मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में जो मोक्षदा नामकी एकादशी होती है, तुम सब लोग उसका व्रत करो और उसका पुण्य पितरों को दे डालो । उस पुण्यके प्रभाव से उनका नरक से उद्धार हो जाएगा ।
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं-युधिष्ठिर इस प्रकार राजा मुनि की बात सुनकर अपने घर लौट आये | जब मार्गशीर्ष मास आया, तब राजा ने मुनि के कहे के अनुसार मोक्षदा एकादशीका व्रत किया। उसका पुण्यअपने पितरों सहित पिता को दे दिया। वैखानस के पिता पितरों को सहित नरक से छुटकारा मिल गया और वो बोले-तुम्हारा कल्याण हो। यह कहकर वे स्वर्ग में चले गए। इसलिए जो मोक्षदा एकादशीका व्रत करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है। ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे वाजपेय यज्ञका फल मिलता है।





