
Mokshada Ekadashi: मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया 10 घंटे से भी देर तक, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, उपाय
Mokshada Ekadashi Time 2025 Muhurat: मोक्षदा एकादशी का व्रत हर साल में मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाएगा। गौर फरमाने वाली बात ये रहेगी की इस दिन भद्रा का साया कई घंटो तक रहने वाला है।
Mokshada Ekadashi Time: इस साल सोमवार के दिन उदया तिथि में मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, 30 नवंबर को रात 09:29 मिनट बजे से एकादशी तिथि शुरू होगी, जिसका समापन 1 दिसंबर के दिन शाम में 07 बजे तक होगा। मोक्षदा एकादशी का व्रत हर साल में मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाएगा। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का उपदेश दिया था। इसलिए मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गौर फरमाने वाली बात ये रहेगी की इस दिन भद्रा का साया कई घंटो तक रहने वाला है। 1 दिसंबर को चंद्रमा भी मीन राशि में रात 11:18 मिनट तक रहेंगे। मीन राशि में चंद्र के होने से भद्रा का प्रभाव पृथ्वी लोक पर रहेगा।
मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया 10 घंटे से भी देर तक
द्रिक पंचांग के अनुसार, 1 दिसंबर को सुबह में 08:19 बजे से शाम 07:01 बजे तक भद्रा रहेगी। राहुकाल भी सुबह में 08:15 से 09:33 ए एम तक रहेगा। भद्रा व राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 05:08 ए एम से 06:02 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:49 ए एम से 12:31 पी एम
विजय मुहूर्त: 01:55 पी एम से 02:37 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 05:21 पी एम से 05:48 पी एम
अमृत काल: 09:05 पी एम से 10:34 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:43 पी एम से 12:38 ए एम, दिसम्बर 02
अमृत: सर्वोत्तम 06:56 ए एम से 08:15 ए एम
पूजा-विधि
- स्नान कर मंदिर की साफ सफाई करें
- भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
- प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
- संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
- मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
- पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
- प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
- अंत में क्षमा प्रार्थना करें
मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
उपाय: श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें और सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





