मोहिनी एकादशी और रात्रि जागरण, क्या है इसका महत्व, एकादशी व्रत में रात्रि जागरण क्यों जरूरी?

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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मोहिनी भगवान विष्णु का अवतार रूप थीं। इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर जब देवों और असुरों में विवाद हुआ तो उसके निस्तारण के लिए स्वयं भगवान विष्णु ने ही मोहिनी रूप

मोहिनी एकादशी और रात्रि जागरण, क्या है इसका महत्व, एकादशी व्रत में रात्रि जागरण क्यों जरूरी?

शास्त्रीय वर्णन के अनुसार मोहिनी भगवान विष्णु का अवतार रूप थीं। इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर जब देवों और असुरों में विवाद हुआ तो उसके निस्तारण के लिए स्वयं भगवान विष्णु ने ही मोहिनी रूप लिया। जिस तिथि पर भगवान विष्णु प्रकट हुए थे, उस दिन एकादशी थी। तब से यह एकादशी मोहिनी एकादशी के रूप में जानी जाने लगी। वैशाख मास की इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। इस एकादशी में व्रत का संकल्प लेकर शाम को पूजा और कथा करने के बाद रात्रि जागरण का खास महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि जो एकादशी के दिन अच्छे श्रद्धा भक्ति से रात्रि जागरण करना चाहिए, इससे श्रीहरि की भक्ति मिलती है।

एकादशी व्रत में रात्रि जागरण से क्या लाभ मिलता है?

विशेषतः एकादशी की रात में जागकर श्रीहरि की पूजा कर रहे हैं तो इससे आप श्रीहरि को प्रसन्न कर लेंगे। जागरणके समय एक क्षण गोविन्दका नाम लेनेसे व्रतका चौगुना फल होता है, एक पहर तक नामोच्चारण से कोटि गुना फल मिलता है। रात के समय जागरण करके भगवान् के आगे नृत्य करता है, उससे भगवान प्रसन्न होते हैं और उसके पुण्य का फल जन्म से लेकर मृत्युकाल तक देते हैं। अगर जागरण के समय पुराण की कथा पढ़ने के साथ कीर्तन और नाच-गान कराना चाहिए। एकादशी में विष्णु भगवान के लिए के लिए जागरण करने पर एक हजार अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। इस प्रकार एकादशी व्रत रखें तो रात में भगवान का जागरण जरूर करें।

एकादशी व्रत से क्या लाभ

ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत रखने से पिछले पापों के शमन होता है। इस दिन जो व्रत करता है, उसके पाप तो खत्म होते ही हैं, साथ ही उसे सुख-सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। भगवान विष्णु को एकादशी व्रत बहुत प्रिय है। शास्त्रों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि श्रीविष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए प्रभु श्रीराम और राजा युधिष्ठिर ने भी मोहिनी एकादशी का व्रत किया था। आज एकादशी में ध्रुव योग, अमृत सिद्धि और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ त्रिवेणी संयोग बन रहा है। आज के दिन ठाकुर जी को मोहिनी रूप में तैयार किया जाता है। सुबह-सुबह भगवान का अभिषेक और पूजन होगा आपको बता दें कि अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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