Mohini ekadashi 2026: अप्रैल में कब है मोहिनी एकादशी, किस तिथि को किया जाएगा एकादशी व्रत

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mohini ekadashi kab hai: एकादशी के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। साफ कपड़े पहनें। इस दिन सबसे पहले पूजा का संकल्प लें। भगवान को चंदन अर्पित करें और भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। 

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वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान ने देवताओं को अमृत पिलाने के लिए और राहु को अमृत पिलाने से बचाने के लिए मोहिनी रुप धरा था। जिसके बाद राहु और केतु अमृत पी नहीं पाएं और छल से सभी देवताओं को अमृत पिला दिया। सभी पापों को क्षय करके इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। ये एकादशी व्रत सतयुग से चला आ रहा है। इस व्रत को सतयुग में कौटिन्य मुनि ने इस व्रत के बारे में शिकारी को बताया था, फिर द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत के बारे में बताया। तब से मोहिनी एकादशी व्रत चला आ रहा है।इसके बाद त्रेतायुग में महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को इस व्रत का महत्व बताया । इस साल व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा।

कैसे करें पूजा मोहिनी एकादशी की पूजा

एकादशी के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। साफ कपड़े पहनें। इस दिन सबसे पहले पूजा का संकल्प लें। भगवान को चंदन अर्पित करें और भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। इस दिन भगवान के विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। भगवान विष्णु को पंचामृत और जल से मूर्ति का अभिषेक करें। भगवान विष्णु को पीले फूल और तुलसी पत्र चढ़ाएं। धूप, दीप से आरती करें। एकादशी व्रत के बाद रात में भजन कीर्तन करें। ऐसा कहा जाता है कि इस दो व्रत करता है, उसे बहुत पुण्य मिलता है। पुराणों में कहा गया है कि जो एकादशी के दिन व्रत करता है, उसे गौदान के बराबर फल मिलता है।

क्या है समुंद्र मंथन की कहानी

स्कंद पुराण के वैष्णव खंड के मुताबिक समुद्र मंथन से निकले अमृत की कहानी लिखी गई है। इसमें लिखा है कि कैसे भगवान शिव ने संमुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पिया था और कैसे भगवान विष्णु ने अमृत की रक्षा करने के लिए मोहिनी रूप लिया था, जिससे देवता ही अमृतपान कर सकें। कहानी के स्वरभानु राक्षस को जब पता चला तो वो भी अमृत पान के लिए लाइन में लग गए, लेकिन सूर्य और चंद्र ने उन्हें पहचान लिया और इसके बाद विष्णु जी ने मोहिनी रुप धरा और सिर्फ देवताओं को अमृतपान कराया। मोहिनी रुप भगवान ने एकादशी के दिन धरा था,इसलिए इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Anuradha Pandey

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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