मेष संक्रांति 2026: 14 अप्रैल को सूर्य करेंगे राशि परिवर्तन, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त और क्या करें
अप्रैल महीने में आने वाली मेष संक्रांति को हिंदू परंपरा में खास माना जाता है। इस साल यह 14 अप्रैल को पड़ रही है। इसी दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष के अनुसार मेष में सूर्य को मजबूत माना जाता है, इसलिए इस बदलाव को शुभ संकेत की तरह देखा जाता है।

अप्रैल महीने में आने वाली मेष संक्रांति को हिंदू परंपरा में खास माना जाता है। इस साल यह 14 अप्रैल को पड़ रही है। इसी दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष के अनुसार मेष में सूर्य को मजबूत माना जाता है, इसलिए इस बदलाव को शुभ संकेत की तरह देखा जाता है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ एक संक्रांति के रूप में नहीं देखते, बल्कि एक नई शुरुआत के तौर पर भी मानते हैं। वजह यह है कि सूर्य यहीं से अपनी वह यात्रा शुरू करते हैं, जिसमें वे एक-एक करके सभी राशियों में प्रवेश करते हैं। इस कारण कई जगहों पर इसे नए साल से जोड़कर भी देखा जाता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन का नाम भी बदल जाता है।
ओडिशा में इसे पना संक्रांति कहा जाता है, केरल में विषु के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पुथंडु, असम में बिहू और पंजाब में वैसाखी के तौर पर लोग इसे सेलिब्रेट करते हैं। नाम अलग-अलग हैं, लेकिन भाव एक जैसा रहता है- नई शुरुआत और शुभ काम।
इस बार की मेष संक्रांति एक और वजह से भी अहम है। इसी दिन खरमास खत्म हो रहा है। पिछले करीब एक महीने से जिन घरों में शादी या अन्य मांगलिक काम टल रहे थे, वे अब फिर से शुरू हो सकेंगे। आम तौर पर लोग इसी दिन के बाद तारीखें तय करना शुरू करते हैं।
अगर समय की बात करें तो 14 अप्रैल को सुबह 05:57 बजे से दोपहर 01:55 बजे तक पुण्य काल रहेगा। वहीं सुबह 07:30 बजे से 11:47 बजे तक का समय महा पुण्य काल माना गया है। लोग अपनी सुविधा के हिसाब से इसी दौरान पूजा या दान-पुण्य करते हैं।
इस दिन क्या करें- इस दिन क्या करना चाहिए, इसे लेकर भी कुछ परंपराएं हैं। जैसे सुबह जल्दी उठकर स्नान करना। जिनके लिए संभव हो, वे नदी में स्नान करते हैं, खासकर गंगा में। लेकिन हर किसी के लिए यह संभव नहीं होता, इसलिए घर पर ही पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करने की बात कही जाती है।
स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा भी है। कई लोग इस समय मंत्र पढ़ते हैं या सूर्य की ओर देखकर प्रार्थना करते हैं। यह सब करने के पीछे मान्यता यही है कि जीवन में ऊर्जा बनी रहे और कामों में रुकावट कम आए।
इसके अलावा इस दिन दान का भी चलन है। लोग अपनी क्षमता के हिसाब से अनाज, कपड़े या रोजमर्रा की चीजें जरूरतमंदों को देते हैं। पुराने लोगों का कहना है कि ऐसे काम करने से मन को सुकून मिलता है और जीवन में संतुलन बना रहता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
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