मेष राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती से कब मिलेगी राहत? जानिए सही समय और उपाय
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की चाल के आधार पर जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव को समझा जाता है। कई बार कुंडली में दोष या अशुभ ग्रहों का असर होने पर व्यक्ति को कामों में रुकावट झेलनी पड़ती है। वहीं, जब शुभ ग्रह साथ देते हैं, तो वही काम आसानी से पूरे होने लगते हैं।

ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की चाल के आधार पर जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव को समझा जाता है। कई बार कुंडली में दोष या अशुभ ग्रहों का असर होने पर व्यक्ति को कामों में रुकावट झेलनी पड़ती है। वहीं, जब शुभ ग्रह साथ देते हैं, तो वही काम आसानी से पूरे होने लगते हैं। ज्योतिष के अनुसार, कर्मों का फल देने का काम शनि देव करते हैं। अगर व्यक्ति अच्छे काम करता है, तो शनि देव उसका साथ देते हैं। लेकिन गलत काम करने पर समय आने पर उसका परिणाम भी भुगतना पड़ता है। खासकर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के समय कई लोगों को कठिन दौर से गुजरना पड़ता है।
मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती
इस समय मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ऐसे में मेष राशि वालों के मन में यह सवाल रहता है कि उन्हें साढ़ेसाती से कब राहत मिलेगी।
ज्योतिष गणना के अनुसार, शनि देव ने 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश किया था। शनि एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं। इसी क्रम में शनि मीन राशि में कुछ समय तक रहेंगे और फिर 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
जब शनि मेष राशि में आएंगे, तो उस समय वृषभ राशि वालों पर साढ़ेसाती की शुरुआत होगी। वहीं, कुंभ राशि के जातकों को इस समय साढ़ेसाती से राहत मिल जाएगी।
मेष राशि वालों को 2032 में मिलेगी राहत
मेष राशि वालों के लिए असली राहत थोड़ा आगे जाकर मिलेगी। शनि देव 31 मई 2032 को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी समय मेष राशि वालों को साढ़ेसाती से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। यानि मेष राशि वालों को साढ़ेसाती से राहत 2032 में मिलेगी, जब शनि मिथुन राशि में जाएंगे।
इन बातों का रखें ध्यान
इस दौरान धैर्य रखना सबसे जरूरी माना जाता है। जल्दबाजी या गलत फैसलों से बचना चाहिए।
करें ये उपाय
ज्योतिष में कुछ आसान उपाय भी बताए जाते हैं, जिन्हें अपनाने से मन को राहत मिल सकती है। मेष राशि के जातकों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करें। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। लाल रंग का फल या प्रसाद अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से शनि देव का प्रभाव कुछ हद तक शांत हो सकता है। इसके अलावा “ॐ शं शनैश्चराय नमः” जैसे मंत्रों का जाप भी किया जाता है।
कुल मिलाकर, शनि का असर जीवन में सीख देने वाला होता है। यह समय मुश्किल जरूर लग सकता है, लेकिन सही दिशा में चलने पर आगे का रास्ता साफ हो जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
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