मेष राशि पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती, 2032 तक रहेगा असर, जानें आगे कैसा रहेगा समय

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती 2025 से शुरू हो चुकी है। इसका असर 2032 तक रहेगा। साढ़े सात साल का ये समय ज्योतिष में अहम माना जाता है। इसे पूरी तरह खराब नहीं कहा जाता, लेकिन आसान भी नहीं माना जाता। इस दौरान इंसान को कई चीजें समझनी पड़ती हैं।

मेष राशि पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती, 2032 तक रहेगा असर, जानें आगे कैसा रहेगा समय

मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती 2025 से शुरू हो चुकी है। इसका असर 2032 तक रहेगा। साढ़े सात साल का ये समय ज्योतिष में अहम माना जाता है। इसे पूरी तरह खराब नहीं कहा जाता, लेकिन आसान भी नहीं माना जाता। इस दौरान इंसान को कई चीजें समझनी पड़ती हैं। फैसले लेने का तरीका बदलता है और धैर्य की जरूरत ज्यादा पड़ती है।

शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं।

शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण- अभी मेष राशि साढ़ेसाती के पहले चरण में है। इस चरण का असर सीधा दिमाग और सोच पर पड़ता है। बिना वजह चिंता हो सकती है। कई बार ऐसा लगेगा कि सब ठीक है, फिर भी मन शांत नहीं रहेगा। सोच ज्यादा चलेगी। छोटी बात भी दिमाग में घूमती रहेगी। नींद पर भी असर दिख सकता है। कुछ लोग ज्यादा सोचने की वजह से परेशान हो सकते हैं। काम चलते रहेंगे, लेकिन मन पूरी तरह जुड़ नहीं पाएगा। हालांकि इसी समय में इंसान खुद को समझना भी शुरू करता है। क्या जरूरी है और क्या नहीं, ये धीरे-धीरे साफ होने लगता है। कई लोग इस दौरान अपने फैसलों को दोबारा देखते हैं। दिशा बदलने का भी मन बन सकता है।

शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण- मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण 2027 से 2029 के बीच रहेगा। इसे साढ़ेसाती का सबसे भारी समय माना जाता है। इस दौरान जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। काम ज्यादा रहेगा, लेकिन उसके हिसाब से रिजल्ट तुरंत नहीं मिलेगा। कई बार लगेगा कि मेहनत हो रही है, लेकिन फायदा नहीं दिख रहा। इसी वजह से मन में दबाव बढ़ सकता है। पैसों के मामले में भी सावधानी जरूरी रहेगी। खर्च बढ़ सकते हैं या अचानक कुछ जिम्मेदारी आ सकती है। रिश्तों में भी खींचतान की स्थिति बन सकती है। खासकर तब, जब आप खुद दबाव में हों।सेहत का भी इस समय विशेष ध्यान रखना होता है। शरीर और दिमाग दोनों पर असर दिख सकता है। लेकिन यही समय सबसे ज्यादा सिखाता भी है। कौन साथ है, कौन नहीं- ये साफ दिखने लगता है। किस पर भरोसा करना है और कहां रुकना है, ये समझ आने लगता है। इस चरण में धैर्य और अनुशासन सबसे ज्यादा काम आते हैं।

शनि की साढ़ेसाती का तीसरा चरण- शनि की साढ़ेसाती का तीसरा चरण 2029 के बाद शुरू होगा और 2032 तक चलेगा। इस समय को राहत वाला माना जाता है। जो चीजें पहले अटकी हुई थीं, वो धीरे-धीरे बनने लगती हैं। काम में स्थिरता आती है। पैसों की स्थिति संभलने लगती है। रिश्तों में भी पहले जैसा तनाव कम हो सकता है। मन का दबाव भी धीरे-धीरे कम होता है। आत्मविश्वास वापस आता है। जो मेहनत पिछले सालों में की गई होती है, उसका असर इसी समय दिखने लगता है। लोग महसूस करते हैं कि मुश्किल समय ने उन्हें मजबूत बनाया है।

शनि की साढ़ेसाती के दौरान इन बातों का रखें ध्यान-

  • इस दौरान जरूरी है कि जल्दबाजी से बचें। पैसों को संभालकर रखें। बेवजह के विवाद से दूर रहें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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