मेष, कुंभ, मीन वालों को कब मिलेगी शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति? यहां जानें डेट और खास उपाय
शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही लोग थोड़ा घबरा जाते हैं। वजह ये है कि इसका समय लंबा होता है- करीब साढ़े सात साल। लेकिन हर बार यह सिर्फ बुरा ही हो, ऐसा भी नहीं है। कई लोगों के लिए यही समय मेहनत का फल भी दिलाता है।

शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही लोग थोड़ा घबरा जाते हैं। वजह ये है कि इसका समय लंबा होता है- करीब साढ़े सात साल। लेकिन हर बार यह सिर्फ बुरा ही हो, ऐसा भी नहीं है। कई लोगों के लिए यही समय मेहनत का फल भी दिलाता है। फर्क बस इतना होता है कि इस दौरान चीजें आसानी से नहीं मिलतीं, थोड़ा धैर्य और समझदारी रखनी पड़ती है। अभी मेष, कुंभ और मीन- तीनों राशियों पर अलग-अलग चरणों में साढ़ेसाती चल रही है। इसलिए तीनों के लिए राहत का समय भी अलग-अलग है।
आइए जानते हैं, मेष, कुंभ और मीन राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति कब मिलेगी?
मेष राशि- मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती की शुरुआत 29 मार्च 2025 से हुई है। यह इसका पहला चरण है। शुरुआत में अक्सर जीवन में बदलाव ज्यादा दिखते हैं- काम का दबाव, जिम्मेदारियां बढ़ना या मन थोड़ा अस्थिर रहना। इस राशि के लोगों को पूरी राहत 31 मई 2032 को मिलेगी, जब शनि मिथुन राशि में चले जाएंगे। तब तक धीरे-धीरे चीजें समझ में आने लगती हैं और इंसान खुद भी मजबूत हो जाता है।
कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए अच्छी बात यह है कि इनका साढ़ेसाती का आखिरी दौर चल रहा है। आखिरी चरण में आमतौर पर राहत महसूस होने लगती है। 3 जून 2027 को जब शनि राशि बदलेंगे, उसी समय कुंभ राशि वालों की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। यानी अब ज्यादा लंबा इंतजार नहीं है।
मीन राशि- मीन राशि के लोगों के लिए अभी थोड़ा समय बाकी है। 3 जून 2027 से इन पर दूसरा चरण शुरू होगा, जो सबसे ज्यादा असर दिखाने वाला माना जाता है। इस दौरान काम, पैसा और मानसिक संतुलन- तीनों पर ध्यान देना पड़ता है। 8 अगस्त 2029 को शनि के आगे बढ़ने के साथ मीन राशि वालों को साढ़ेसाती से राहत मिलेगी।
शनि की साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय-
- हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना।
- काले तिल या जरूरतमंद को कुछ दान करना।
- “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करना।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाना।
छायादान का आसान तरीका- शनिवार के दिन एक कटोरे में तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर वही तेल दान कर दें। इसे छायादान कहते हैं। माना जाता है कि इससे शनि का असर थोड़ा हल्का होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
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