मीन संक्रांति 2026: 14 या 15 मार्च? जानें सही तारीख, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश का समय और कब से शुरू होगा खरमास

Mar 14, 2026 01:48 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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ज्योतिष के हिसाब से सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। इसे संक्रांति कहा जाता है। इस बार सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में 14 और 15 मार्च की आधी रात के आसपास प्रवेश करेंगे। इसी वजह से मीन संक्रांति की सही तारीख को लेकर अलग-अलग पंचांग में थोड़ा अंतर बताया जा रहा है।

मीन संक्रांति 2026: 14 या 15 मार्च? जानें सही तारीख, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश का समय और कब से शुरू होगा खरमास

ज्योतिष के हिसाब से सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। इसे संक्रांति कहा जाता है। इस बार सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में 14 और 15 मार्च की आधी रात के आसपास प्रवेश करेंगे। इसी वजह से मीन संक्रांति की सही तारीख को लेकर अलग-अलग पंचांग में थोड़ा अंतर बताया जा रहा है। कुछ पंचांग 14 मार्च को मीन संक्रांति मान रहे हैं, जबकि कुछ के अनुसार 15 मार्च को यह पर्व मनाया जाएगा। सूर्य पूरे साल में सभी 12 राशियों में जाते हैं, इसलिए साल भर में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। इस दिन कई लोग सूर्य पूजा करते हैं, नदी या पवित्र जल में स्नान करते हैं और दान भी करते हैं।

मीन संक्रांति के साथ ही शुरू होगा खरमास

जैसे ही सूर्य मीन राशि में आएंगे, उसी समय से खरमास भी शुरू हो जाएगा। यह समय लगभग 14 अप्रैल सुबह करीब 9:30 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस अवधि में कई मांगलिक काम टाल दिए जाते हैं। खरमास के दौरान आमतौर पर शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे बड़े शुभ काम नहीं किए जाते। लोग इन कार्यक्रमों के लिए खरमास खत्म होने का इंतजार करते हैं।

मीन संक्रांति पर क्या करें

मीन संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना अच्छा माना जाता है। इसके बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। इसके लिए तांबे के लोटे में पानी लेकर उसमें कुमकुम, चावल और लाल फूल डाल सकते हैं। जल चढ़ाते समय “ओम सूर्याय नमः” मंत्र बोलना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी अच्छा माना जाता है। इस दिन कई लोग अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल या पैसे का दान भी करते हैं।

खरमास को लेकर धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास के समय सूर्यदेव अपने गुरु बृहस्पति की सेवा करते हैं। साल में दो बार खरमास आता है। एक बार तब जब सूर्य धनु राशि में होते हैं और दूसरी बार तब जब सूर्य मीन राशि में आते हैं। इन दोनों राशियों के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं। इसी वजह से कहा जाता है कि इन दिनों सूर्य गुरु के घर रहते हैं और किसी बड़े शुभ काम में शामिल नहीं होते। इसलिए इस समय शादी या गृह प्रवेश जैसे कार्यक्रम नहीं किए जाते।

मीन राशि में बनेगा तीन ग्रहों का योग

इस बार सूर्य के मीन राशि में आने से एक खास ग्रह योग भी बनेगा। अभी मीन राशि में शुक्र और शनि पहले से मौजूद हैं और अब सूर्य भी वहीं पहुंच जाएंगे। इससे तीन ग्रह एक साथ हो जाएंगे।ज्योतिष के अनुसार सूर्य और शनि का रिश्ता पिता-पुत्र का माना जाता है, लेकिन दोनों के बीच टकराव भी बताया जाता है। ऐसे में कुछ लोगों को रिश्तों में दूरी महसूस हो सकती है। वहीं शुक्र की वजह से पुराने दोस्तों से मुलाकात या बातचीत बढ़ सकती है। शनि काम में स्टेबिलिटी देता है और सूर्य लीडरशिप से जुड़े कामों में मदद कर सकता है।

खरमास में ही चैत्र नवरात्रि

इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। खास बात यह है कि यह पूरा समय भी खरमास के दौरान ही आएगा। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। इन नौ दिनों में भक्त मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और घर-मंदिरों में पूजा-पाठ करते हैं।

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लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

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