
सुबह-शाम इन मुहूर्त में करें मौनी अमावस्या दान, स्नान व पूजा, जानें विधि व उपाय
Mauni Amavasya Time kab hai Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या मौन रहने का दिन है। सुबह उठकर मौन अवस्था में गंगा माता और भगवान शिव का ध्यान कर स्नान, दान, पूजा होती है। जानें मौनी अमावस्या का खास उपाय व किन चीजों का दान करना शुभ रहेगा-
Mauni Amavasya Timing kab hai Mauni Amavasya 2026: आज रविवार के दिन मौनी अमावस्या का स्नान व दान किया जाएगा। मौनी अमावस्या मौन रहने का दिन है। भक्त इस खास दिन पर, पूरे दिन एक भी शब्द का उच्चारण न करते हुए उपवास रखते हैं। मौनी अमावस्या के दिन दान, पुण्य, पूजन और स्नानादि से शीघ्र फल मिलता है। सुबह उठकर मौन अवस्था में गंगा माता और भगवान शिव का ध्यान कर स्नान किया जा सकता है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन दान, स्नान व पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि व उपाय-
सुबह-शाम इन मुहूर्त में करें मौनी अमावस्या दान, स्नान व पूजा
- अभिजित मुहूर्त 12:10 पी एम से 12:53 पी एम
- विजय मुहूर्त 02:17 पी एम से 03:00 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 05:46 पी एम से 06:13 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या 05:49 पी एम से 07:09 पी एम
- अमृत काल 05:02 ए एम, जनवरी 19 से 06:44 ए एम, जनवरी 19
- निशिता मुहूर्त 12:05 ए एम, जनवरी 19 से 12:58 ए एम, जनवरी 19
- सर्वार्थ सिद्धि योग 10:14 ए एम से 07:14 ए एम, जनवरी 19
- चर - सामान्य 08:34 ए एम से 09:53 ए एम
- लाभ - उन्नति 09:53 ए एम से 11:12 ए एम
- शुभ - उत्तम 01:51 पी एम से 03:10 पी एम
- शुभ - उत्तम 05:49 पी एम से 07:29 पी एम
- अमृत - सर्वोत्तम 07:29 पी एम से 09:10 पी एम
- चर - सामान्य 09:10 पी एम से 10:51 पी एम
पूजा विधि
1- स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
2- गणेश जी को प्रणाम करें
3- विष्णु जी का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
4- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
5- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
6- श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें
7- पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु जी की आरती करें
8- तुलसी दल सहित भोग लगाएं
9- अंत में क्षमा प्रार्थना करें
मौनी अमावस्या उपाय: जिन जातकों का बुध ग्रह पीड़ित या अशुभ फल दे रहा है, वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रहकर तुलसी के पौधे का पूजन करें तथा सुबह तुलसी पत्तियों का सेवन करें। किन्नरों को हरी चूड़ियां व हरे रंग की साड़ी का दान करने से बुध ग्रह शुभ फल देने लगता है। जिन लोगों का चंद्र ग्रह अशुभ फल दे रहा है, वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखें। इस दिन तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कम्बल व वस्त्र के दान का विशेष महत्व है। यह अत्यंत शुभदायी होता है।
माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन ही कलियुग का आगमन हुआ था। सुबह के समय ही कलियुग का प्रवेश हुआ था। कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए मौन रहकर स्नान करने की परंपरा चली आ रही है।
माघ मेला 2026: प्रयागराज, माघ मेला का तीसरा और सबसे प्रमुख मौनी अमावस्या का महास्नान रविवार को होना है। इस स्नान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम एक दिन पहले ही संगमनगरी में पहुंच गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर बाद काफी बढ़ गया। शाम को तो स्थिति यह हो गई थी कि लग रहा था मानो शनिवार को ही मौनी अमावस्या हो। रविवार की भीड़ से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने पर्व से एक दिन शनिवार को ही स्नान कर लिया। दोपहर एक बजे पांटून पुल पर इतने श्रद्धालु हो गए थे कि बहुत धीरे-धीरे चलना पड़ रहा था। पांटून पुल दो से संगम आने और तीन से झूंसी जाने वाले पुलों पर केवल पैदल श्रद्धालु ही दिख रहे थे।
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