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मौनी अमावस्या पर गुप्त तरह से करें इन चीजों का दान, 7 पीढ़ियां रहेंगी खुशहाल

मौनी अमावस्या पर गुप्त तरह से करें इन चीजों का दान, 7 पीढ़ियां रहेंगी खुशहाल

संक्षेप:

मौनी अमावस्या पितरों की पूजा और तर्पण का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन गुप्त दान करने से पितरों को विशेष तृप्ति मिलती है और वंश की 7 पीढ़ियों तक सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Jan 17, 2026 03:46 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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मौनी अमावस्या पितरों की पूजा और तर्पण का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन गुप्त दान (अज्ञात रूप से दान) करने से पितरों को विशेष तृप्ति मिलती है और वंश की 7 पीढ़ियों तक सुख-समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों में कहा गया है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर जो दान किया जाता है, वह अक्षय पुण्य देता है और पितृ दोष, शनि-राहु के प्रभाव से मुक्ति दिलाता है। गुप्त दान का अर्थ है - बिना किसी को बताए, बिना दिखावे के, गरीब या जरूरतमंद को दान करना। इस दिन 4 विशेष चीजों का गुप्त दान बहुत फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं इनका महत्व और विधि।

काले तिल का गुप्त दान

मौनी अमावस्या पर काले तिल का दान सबसे प्रमुख माना जाता है। शनि और पितर दोनों काले तिल से प्रसन्न होते हैं। गुप्त रूप से किसी गरीब या ब्राह्मण को काले तिल दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और 7 पीढ़ियों तक वंश में सुख-शांति बनी रहती है। विधि: सुबह स्नान के बाद काले तिल को काले कपड़े में बांधकर किसी जरूरतमंद को चुपके से दें। दान करते समय मन में पितरों का स्मरण करें और 'ॐ पितृभ्यो नमः' बोलें। इससे पितृ दोष दूर होता है और घर में धन-धान्य की बरकत बढ़ती है।

जूते-चप्पल का गुप्त दान

इस दिन गरीबों को जूते-चप्पल का दान बहुत पुण्यदायी है। शास्त्रों में कहा गया है कि जूते-चप्पल दान करने से व्यक्ति के पैरों के नीचे की बाधाएं दूर होती हैं और यात्रा में सफलता मिलती है। गुप्त रूप से किसी भिखारी या जरूरतमंद को नए या अच्छे हालत वाले जूते-चप्पल दें। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और वंश की 7 पीढ़ियों तक गरीबी और कर्ज का बोझ नहीं रहता है। दान के समय पितरों का स्मरण करें और चुपके से दें।

कंबल या ऊनी वस्त्र का गुप्त दान

मौनी अमावस्या सर्दियों में पड़ती है, इसलिए कंबल या ऊनी वस्त्र का दान विशेष फलदायी है। गरीबों को कंबल दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और वंश में ठंड, कष्ट और रोग दूर रहते हैं। गुप्त रूप से किसी असहाय व्यक्ति को कंबल या ऊनी शॉल दें। इससे परिवार की 7 पीढ़ियों तक सुख-शांति और स्वास्थ्य बना रहता है। दान करते समय मौन रहें और मन में पितरों की शांति की कामना करें।

अनाज और भोजन का गुप्त दान

अनाज (चावल, गेहूं, उड़द) या भोजन का गुप्त दान मौनी अमावस्या पर बहुत शुभ है। किसी गरीब या मंदिर में चुपके से अनाज या भोजन का पैकेट रखकर आएं। इससे पितरों को तृप्ति मिलती है और घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है। विधि: अनाज को सफेद कपड़े में बांधकर दान करें। इससे वंश की 7 पीढ़ियों तक समृद्धि बनी रहती है।

मौनी अमावस्या पर गुप्त दान का विशेष महत्व है। काले तिल, जूते-चप्पल, कंबल और अनाज का दान बिना दिखावे के करें। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और वंश में 7 पीढ़ियों तक सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन मौन रहकर पूजा करें और दान करें तो जीवन में शांति और धन की प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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