मौनी अमावस्या के दिन बुधादित्य,भौमादित्य योग, महालक्ष्मी योग, पितरों का तर्पण कब करें, शाम को कहां दिया जलाएं

Jan 18, 2026 08:40 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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माघ महीने में सबसे अधिक पुण्य प्रदान करने वाले प्रमुख स्नानो में मौनी अमावस्या को माना जाता है। शास्त्रों की माने तो कहा जाता है की प्रयाग की पावन भूमि पर माघ महीने में रहकर कल्पवास करने से व्यक्ति के कई जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं

मौनी अमावस्या के दिन बुधादित्य,भौमादित्य योग, महालक्ष्मी योग, पितरों का तर्पण कब करें, शाम को कहां दिया जलाएं

माघ महीने में सबसे अधिक पुण्य प्रदान करने वाले प्रमुख स्नानो में मौनी अमावस्या को माना जाता है। शास्त्रों की माने तो कहा जाता है की प्रयाग की पावन भूमि पर माघ महीने में रहकर कल्पवास करने से व्यक्ति के कई जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं तथा वर्तमान जन्म में जाने अनजाने में किए गए पाप भी समाप्त हो जाते हैं तथा पितरों की परम कृपा प्राप्त होती है। पितरों के शुभ आशीर्वाद से सभी सुख प्राप्त होते है परंतु यदि किसी कारण से व्यक्ति कल्प वास नहीं कर पाता। तो प्रमुख स्नानों पर संगम की पवन जल में स्नान करने से कल्पवास का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इसमें भी यदि मौनी अमावस्या के दिन स्नान कर लिया जाए तो एक महीने के कल्पवास का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। ऐसी भी मान्यता है मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करते हुए त्रिवेणी में पश्चिम वाहिनी गंगा में स्नान करने से तथा दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है।

माघ कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि का आरंभ 17 जनवरी 2026 दिन शनिवार की रात में 11:53 बजे के बाद से आरंभ होगा। जो 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को रात में 1:08 बजे तक व्याप्त होगा। ऐसी स्थिति में 18 जनवरी दिन रविवार को सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही अमावस्या के स्नान दान का शुभ मुहूर्त आरंभ हो जाएगा। माघ कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र सरोवर में स्नान दान एवं पितरों के प्रतिष्ठा तर्पण करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रयागराज की पावन संगम तट में दशाश्वमेध घाट तथा पश्चिम वाहिनी गंगा में स्नान करने से तथा दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्या दान करें और पितरों का तर्पण कब करें

इस दिन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और धूप-ध्यान करने से तृप्ति मिलती है। अमावस्या की दोपहर करीब 12 बजे गाय के गोबर से बने कंडे जलाकर पितरों का को खीर-पुड़ी अर्पित करें। सूर्य को जल अर्पित करें। गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए भोजन रखें, दान दें। इस दिन जूते-चप्पल, कपड़े, ऊनी वस्त्र, कंबल, अनाज, भोजन, कुमकुम, गुलाल, अबीर, घी-तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, जनेऊ, फूल, मिठाई का दान कर सकते हैं। दान करते समय मौन रहना चाहिए। इस दिन सुबह पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और उसकी परिक्रमा करें। तुलसी के सामने दीपक जलाना चाहिए।

इस दिन सुबह दिन में 10:29 बजे तक पूर्वाषाढा नक्षत्र व्याप्त रहेगा। उसके बाद उत्तराषाढा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। हर्षण नामक योग सूर्योदय से लेकर रात में 9:45 बजे तक बात व्याप्त रहेगा तथा शुभ नमक औदायिक योगा व्याप्त रहेगा। इस दिन चंद्रमा दोपहर बाद दिन में 4:53 बजे के बाद मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस प्रकार मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र, तथा सूर्य के साथ चंद्रमा का भी योग हो जाएगा। जो की परम शुभकारक योग होगा क्योंकि मंगल सूर्य के साथ भौमादित्य योग बनेगा। सूर्य व बुध के साथ बुधादित्य योग बनेगा तथा चंद्रमा मंगल के योग से महालक्ष्मी योग का भी निर्माण होगा। और भौतिकता ऐश्वर्य के कारक ग्रह शुक्र के साथ बुद्धि, विवेक, ज्ञान, मैनेजमेंट के कारक ग्रह बुध के होने से लक्ष्मी नारायण योग का भी निर्माण होगा । इस प्रकार इस बार मौनी अमावस्या के दिन पंच ग्रहीय योग के साथ कई राजयोगों का निर्माण भी हो रहा है।

Anuradha Pandey

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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