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मौनी अमावस्या पर कर लें ये 7 कार्य, पूर्वजों का मिलेगा आशीर्वाद

मौनी अमावस्या पर कर लें ये 7 कार्य, पूर्वजों का मिलेगा आशीर्वाद

संक्षेप:

18 जनवरी 2026, रविवार के दिन पड़ रही मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले मौन रहकर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन व्रत रखना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है।

Jan 16, 2026 11:00 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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मौनी अमावस्या का पर्व इस साल 18 जनवरी 2026 को पड़ रहा है। यह पर्व तपस्या और मौन साधना का होता है। यह समय पवित्र नदियों में स्नान, दान पुण्य का होता है। साथ ही यह दिन पितरों का भी माना जाता है। पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। ऐसे में इस पवित्र दिन किए कुछ कार्य आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इन कार्यों को करने से ना सिर्फ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि आपको पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

मौन व्रत का संकल्प लें
18 जनवरी, रविवार के दिन पड़ रही मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले मौन रहकर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन वाणी पर विराम लगाकर मन ही मन ईश्वर का स्मरण करने से व्यक्ति को 'मुनि पद' के समान पुण्य मिलता है। मौन रहकर की गई पूजा मानसिक शांति और संकल्प शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।

सूर्य को अर्घ्य दें
मौनी अमावस्या पर पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए और पितृ दोष के प्रभाव को कम करने के लिए र्य देव को अर्घ्य दें और अपने पितरों का ध्यान करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष की जड़ों में जल और मिठाई अर्पित करें। इससे पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही इस वृक्ष में वास करने वाले देवता भी प्रसन्न होते हैं।

पीपल वृक्ष की पूजा करें
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अमावस्या की सुबह पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करना और उन पर कच्चा सूत लपेटना एक प्राचीन और सिद्ध परंपरा है। वृक्ष पर कच्चा दूध चढ़ाकर की गई यह पूजा दरिद्रता का नाश करती है और पितरों को तृप्ति प्रदान करती है।

संगम में स्नान करें
मौनी अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करें और पितरों का तर्पण करें। इसके अलावा आप प्रयागराज के माघ मेले में गंगा की लहरों के बीच संगम में डुबकी लगा सकते हैं, जो अनंत गुना फल देने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर संगम और गंगा जल में साक्षात देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का अर्थ है स्वयं को दैवीय ऊर्जा से सराबोर कर लेना और अपने पापों का प्रक्षालन करना।

इन चीजों का दान करें
मौनी अमावस्या के दिन दान करना बेहद पुण्य का कार्य माना जाता है। ऐसे में इस दिन स्नान के बाद गरीब और जरुरतमंदों को तिल के लड्डू, तेल, आंवला, कंबल या ऊनी वस्त्र का दान कर सकते हैं। कड़ाके की ठंड में किया गया यह सेवा भाव न केवल पुण्य बढ़ाता है, बल्कि कुंडली के शनि और राहु दोषों को भी शांत करता है।

भगवान विष्णु की पूजा करें
अमावस्या पर भगवान विष्णु पूजा अर्चना की जाती है। ऐसे में उनकी कृपा प्राप्त करने का यह दिन विशेष होता है। आप उन्हें प्रसन्न करने के लिए पावन अवसर पर उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ या उनके मंत्रों का जप करें। इससे जीवन के अंधकार दूर होते हैं और श्रीहरि का वरदहस्त आपके परिवार पर बना रहता है।

जानवरों के लिए अन्न की व्यवस्था
मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर गाय, कुत्ते, कौवे आदि जानवरों के लिए अन्न जल की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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