पवित्र नदियों में स्नान से लेकर दान-पुण्य...मौनी अमावस्या पर मौन होकर करें ये शुभ काम, बनी रहेगी सुख-समृद्धि
माघ मास स्वयं पुण्य मास है और इसमें अमावस्या का योग होने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन मौन रहकर साधना करने से मन शुद्ध होता है और आत्मिक शांति मिलती है।

मौनी अमावस्या माघ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। इस दिन मौन रहकर पूजा-पाठ, स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और पितृ कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में इसकी महिमा बताई गई है कि इस तिथि पर मनु ऋषि का जन्म हुआ था, इसलिए इसे 'मौनी' अमावस्या कहा जाता है। 18 जनवरी 2026 को पड़ रही इस अमावस्या पर रविवार का योग भी बन रहा है, जिसे 'रवि-मौनी अमावस्या' कहते हैं। इस संयोग में सूर्य और चंद्रमा की कृपा एक साथ मिलती है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर क्या-क्या करना चाहिए।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
माघ मास स्वयं पुण्य मास है और इसमें अमावस्या का योग होने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन मौन रहकर साधना करने से मन शुद्ध होता है और आत्मिक शांति मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि मौनी अमावस्या पर पितरों को तृप्त करने से पितृ दोष दूर होता है। इस दिन प्रयागराज में संगम स्नान से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है। रविवार को पड़ने से सूर्य देव की कृपा भी विशेष रूप से मिलती है। यह तिथि तप, त्याग, संयम और अंतर्मुखी जीवन की प्रेरणा देती है।
मौनी अमावस्या पर स्नान और मौन व्रत
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी (गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा आदि) में स्नान करना चाहिए। अगर तीर्थ यात्रा संभव ना हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद मौन रहने की परंपरा है। पूरे दिन मौन रहना संभव न हो तो कम से कम पूजा-पाठ तक मौन धारण करें। मौन से मन शांत रहता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मा की शुद्धि होती है।
दान-पुण्य और पितरों का तर्पण
मौनी अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करना अनिवार्य है। पूर्वजों को तिल, गुड़, गर्म कपड़े, कंबल, अन्न, जूते-चप्पल, छाता आदि दान करें। इससे पितरों को तृप्ति मिलती है और वे परिवार को आशीर्वाद देते हैं। रविवार होने से सूर्य देव को अर्घ्य दें और लाल वस्तुओं (लाल कपड़ा, लाल फूल, गुड़ आदि) का दान करें। दान से पितृ दोष दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पीपल पूजा और सूर्य अर्घ्य का महाउपाय
मौनी अमावस्या पर पीपल पूजा का विशेष महत्व है। पीपल में ब्रह्मा-विष्णु-महेश, शनि और पितरों का वास माना जाता है। स्नान-ध्यान के बाद पीपल पर दूध मिला जल अर्पित करें, दीपदान करें और कम से कम 11 परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, अक्षत और कुमकुम डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे सूर्य और शनि दोनों प्रसन्न होते हैं और जीवन में बाधाएं दूर होती हैं।
इस दिन क्या ना करें और अन्य शुभ कार्य
मौनी अमावस्या पर सुबह देर तक न सोएं। तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज) ना करें - सात्विक भोजन या व्रत रखें। घर में क्लेश, वाद-विवाद या अपमानजनक व्यवहार ना करें। अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं, इसलिए सुनसान जगह या श्मशान न जाएं। इस दिन बाल गोपाल का अभिषेक करें, माखन-मिश्री और तुलसी चढ़ाएं। मंदिर में पूजन सामग्री (कुमकुम, गुलाल, धूपबत्ती, चंदन, चुनरी आदि) दान करें।
मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को रविवार को पड़ रही है। इस दिन स्नान, मौन, दान, पीपल पूजा और सूर्य अर्घ्य से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहेगी। श्रद्धा से इन कार्यों को करें तो पितृ कृपा और ग्रहों की कृपा दोनों प्राप्त होंगी।





