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Margashirsha Amavasya daan:  मार्गशीर्ष अमावस्या पर क्या दान करें

Margashirsha Amavasya daan: मार्गशीर्ष अमावस्या पर क्या दान करें

संक्षेप:

Margashirsha Amavasya:दिवाली के बाद जो अमावसया आती है, उसे मार्गीशीर्ष अमावस्या कहते हैं। आज उदया तिथि की अमावस्या है। इस साल यह 19 और 20 नवंबर दोनों दिन मनाई जा रही है। मार्गशीर्ष अमावस्या स्नान दान और पितरों के लिए पितृकर्म करना बहुत शुभ माना जाता है

Nov 20, 2025 08:51 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Margashirsha Amavasya 2025: दिवाली के बाद जो अमावसया आती है, उसे मार्गीशीर्ष अमावस्या कहते हैं। आज उदया तिथि की अमावस्या है। इस साल यह 19 और 20 नवंबर दोनों दिन मनाई जा रही है। मार्गशीर्ष अमावस्या स्नान दान और पितरों के लिए पितृकर्म करना बहुत शुभ माना जाता है। आपको बता दें कि आज अमावस्या 12:18:22 दोपहर तक ही रहेगी। इस दिन पितृपक्ष नहीं है, लेकिन इस दिन पितरों के लिए पितृकार्य किएजाते हैं जिससे पितृ खुश होते हैं। पितृ तर्पण का समय सुबह 11:31 से दोपहर 12:32 तक रहेगा। ऐसी लोकमान्यता है कि ऐसा करने से पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। यह तिथि पितरों के अलावा भगवान विष्णु और चंद्रदेव को समर्पित है।

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मार्गीशीर्ष अमावस्या पर क्या दान करें?

इस दिन पितरों के कर्म में काले तिल का दान तो करते ही है, साथ ही इस दिन काले तिल दान भी करने चाहिए। इससे शनि के दोषों में राहत मिलती है। इस दिन गुड़ और घी का दान भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन अगर आप किसी ब्राह्मण को भोजन नहीं करा पाते हैं, तो आप दूध, चीनी, चावल, काली उड़द दाल, घी, सब्जी, अनाज आदि का दान कर सकते हैं। अगर आप किसी जरूरतमंद को पैसे का दान करती हैं। इसके अलावा इस दिन जूते-चप्पल का दान, कंबल, छाता का दान करना भी उत्तम रहता है। इस दिन पितरों के लिए कंबल आदि का दान भी फलदायी रहता है। इससे पितृ दोष और ग्रह दोष शांत होते हैं।

मार्गशीर्ष अमावस्या पर कैसे करें पूजा

इससे आपके घर में सुख समृद्धि के दरवाजे खुलते हैं। इस दिन अपने ​पितरों को खुश करने के लिए आपको ब्राह्मण को भोजन या किसी गरीब व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए। इस दिन सुबह उठे, स्नान करके पहले विष्णु जी को पूजा करें, पंचामृत से स्नान कराएं। फिर देसी घी का दीप प्रज्वलित करें। इसके बाद गोबर के उपले जलाएं और उसमें खीर का भोग अपने पितरों को लगाएं। इसके बाद अपने पितरों से सुखसृमद्धि की कामना करें। फिर काले तिल मिलाकर जल को कुश के साथ सूर्यदेव को अर्पित करें और पितरों का नाम लेते रहें। इसके बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान आदि करें। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें, जल में तिल डालकर अर्घ्य दें, गायत्री मंत्र या भगवान विष्णु के नाम का जाप करें और सूर्य को अर्घ्य दें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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