Mangla Gauri Vrat Katha: यहां पढ़ें मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Mangla Gauri Vrat ki Kahani: हिंदू धर्म में मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सावन माह के मंगलवार को रखे जाते हैं। अगर आप भी मंगला गौरी व्रत करते हैं, तो यहां पढ़ें व्रत की कथा।

mangla gauri vrat katha in hindi
मंगला गौरी व्रत कथा हिंदी में

Mangla Gauri Vrat Kahani, Katha: सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विधान है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित हैं। आज 18 अगस्त 2026, मंगलवार को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के साथ ही व्रत कथा सुनने या पढ़ने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत कथा के पाठ या श्रवण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां पढ़ें मंगला गौरी व्रत कथा।

धनसेठ की नहीं थी संतान

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक धर्मपाल नाम का एक बहुत धनवान सेठ रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। इस बात से वह और उसकी पत्नी बहुत दुखी और निराश रहते थे।

कठिन पूजा-पाठ और भक्ति साधना के बाद उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन ज्योतिषाचार्यों ने भविष्यवाणी की कि उनका बालक अल्पायु है और 16 वर्ष की आयु में सर्पदंश (सांप के काटने) से उसकी मृत्यु हो जाएगी।

माता पार्वती ने दिया था आशीर्वाद

संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई जिसकी माता विधि-पूर्वक मंगला गौरी व्रत किया करती थी। इसी व्रत के प्रभाव से पुत्री के लिए एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था, जिसके कारण वह कभी विधवा नहीं हो सकती थी। इस व्रत के प्रभाव से धर्मपाल की बहू को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई।

विवाह के बाद उस कन्या के मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से उसका भाग्य और काल का चक्र बदल गया। नियत समय पर जब नाग धर्मपाल के पुत्र को डसने आया, तो मां पार्वती की कृपा से उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ और उस लड़के की जान बच गई। इस तरह धर्मपाल का पुत्र अल्पायु दोष से मुक्त होकर दीर्घायु हो हुआ। तभी से मंगला गौरी व्रत की शुरुआत मानी जाती है।

16 बाती वाले दीये से मां पार्वती की आरती

मान्यता है कि इस व्रत को सुनने या पढ़ने के बाद सुहागिन स्त्रियां अपनी सास और ननद को 16 लड्डू देती है। इसके बाद प्रसाद ब्राह्मण को देती है। इस व्रत को विधि-विधान से करने के बाद 16 बाती वाले दीया जलाकर मां पार्वती की आरती का विधान है।

मंगला गौरी व्रत का महत्व:

शास्त्रों के अनुसार, मंगला गौरी व्रत करने से मनुष्य को सुखद वैवाहिक जीवन के साथ अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से मनवांछित फल मिलता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan
Hindi Newsधर्म न्यूज़यहां पढ़ें मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा