मकर और कुंभ में किस राशि पर ज्यादा मेहरबान हैं शनि देव? ज्योतिष से जानें

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह का किसी न किसी राशि से खास संबंध माना गया है। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। हालांकि दोनों राशियों पर शनि का असर एक जैसा नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि देव कुंभ राशि वालों पर थोड़ा ज्यादा मेहरबान रहते हैं।

मकर और कुंभ में किस राशि पर ज्यादा मेहरबान हैं शनि देव? ज्योतिष से जानें

ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह का किसी न किसी राशि से खास संबंध माना गया है। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। हालांकि दोनों राशियों पर शनि का असर एक जैसा नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि देव कुंभ राशि वालों पर थोड़ा ज्यादा मेहरबान रहते हैं, जबकि मकर राशि वालों को सफलता पाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

कुंभ राशि पर क्यों रहती है शनि की खास कृपा?

ज्योतिष के अनुसार कुंभ राशि शनि की मूल त्रिकोण राशि मानी जाती है। इसका मतलब होता है कि इस राशि में शनि अपना असर ज्यादा मजबूत तरीके से दिखाते हैं। यही वजह है कि कुंभ राशि वालों को शनि से अच्छे परिणाम जल्दी मिल जाते हैं। कई बार शनि की साढ़ेसाती या महादशा में भी इन्हें बड़े नुकसान कम ही देखने पड़ते हैं।

कुंभ राशि वालों की खास बातें

कहा जाता है कि कुंभ राशि के लोग मेहनती और समझदार होते हैं। ये लोग हर चीज को सोच-समझकर करने में विश्वास रखते हैं। मुश्किल हालात में भी जल्दी हार नहीं मानते। धैर्य और मेहनत के दम पर धीरे-धीरे अच्छा पैसा और नाम कमाने में सफल रहते हैं। कई बार इनकी सोच दूसरों से काफी अलग और आगे की होती है।

मकर राशि वालों को क्यों करनी पड़ती है ज्यादा मेहनत?

मकर राशि भी शनि की ही राशि है, लेकिन यहां शनि का स्वभाव थोड़ा सख्त माना जाता है। मकर राशि वालों को जीवन में सफलता आसानी से नहीं मिलती। उन्हें लगातार मेहनत, अनुशासन और धैर्य बनाए रखना पड़ता है। हालांकि देर से मिलने वाली सफलता लंबे समय तक टिकती भी है। संघर्ष के बाद ये लोग मजबूत स्थिति बना लेते हैं।

क्या करें शनि देव को खुश करने के लिए?

ज्योतिष में शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है। मान्यता है कि इंसान जैसे कर्म करता है, शनि उसे उसी हिसाब से फल देते हैं। इसलिए लोग शनि की कृपा पाने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। माना जाता है कि अगर शनि नाराज हों तो काम बिगड़ने लगते हैं, पैसा रुकने लगता है और मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। वहीं शनि का साथ मिल जाए तो धीरे-धीरे हालात सुधरने लगते हैं।

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना काफी शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन शाम के समय दीपक जलाकर शनि देव से सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि इससे नकारात्मक असर कम होने लगता है।

हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अच्छा माना गया है। मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष का असर कम होता है। इसलिए शनिवार को हनुमान मंदिर में भक्तों की ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। कई लोग इस दिन सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं।

जरूरतमंद लोगों को दान करना भी शनि को प्रसन्न करने का आसान उपाय माना जाता है। काले तिल, काली उड़द, लोहे की चीजें, जूते-चप्पल या कंबल दान करने की परंपरा काफी पुरानी है। कहा जाता है कि इससे जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

इसके अलावा बुजुर्गों का सम्मान करना, झूठ और गलत कामों से दूर रहना और मेहनत से काम करना भी शनि देव को पसंद माना गया है। ज्योतिष में कहा जाता है कि शनि दिखावे से नहीं बल्कि इंसान के कर्मों से खुश होते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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