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मकर संक्रांति पर कितने बजे करें दान, स्नान, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा की विधि

मकर संक्रांति पर कितने बजे करें दान, स्नान, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा की विधि

संक्षेप:

Makar Sankranti Time, Makar Sankranti 2026: कई सालों के बाद षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। मकर संक्रांति का दिन स्नान और दान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

Jan 14, 2026 02:53 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Makar Sankranti Time: इस साल मकर संक्रांति विशेष तौर पर पुण्यदायक मानी जा रही है। कई सालों के बाद षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। सूर्य और शुक्र की युति इस दिन का महत्व बढ़ा रही है। मकर संक्रांति का दिन स्नान और दान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। 14 फरवरी के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसी दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी लेकिन स्नान और दान 14 एवं 15 जनवरी को किया जाएगा। दोनों दिन मकर संक्रांति की पूजा व दान के लिए शुभ माने जा रहे हैं। आइए जानते हैं मकर संक्रांति के दिन कब से दान करना उत्तम माना जा रहा है-

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मकर संक्रांति पर कितने बजे से करें दान, स्नान, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा की विधि

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि उत्तरायणं देवयानं, दक्षिणायनं पितृयानम्। संक्रांति के पुण्यकाल पर शास्त्रीय नियमों के अनुसार, सामान्य संक्रांतियों में आठ घड़ी पूर्व और आठ घड़ी बाद का पुण्यकाल माना जाता है। जबकि मकर संक्रांति अयन संक्रांति होने के कारण विशेष मानी जाती है। इसमें चालीस घड़ी पूर्व से पुण्य प्रभाव स्वीकार किया गया है, जिसके कारण प्रातः काल स्नान-दान की परंपरा शास्त्र सम्मत है। ऐसे में सुबह से ही स्नान दान किया जा सकेगा।

  1. ब्रह्म मुहूर्त: 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
  2. गोधूलि मुहूर्त: 05:43 पी एम से 06:10 पी एम
  3. सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग: 07:15 ए एम से 03:03 ए एम, जनवरी 15

पूजा की विधि

1 सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और पानी में गंगाजल और मिलाकर स्नान करें।

2- गणेश जी का ध्यान करें।

3- तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, लाल रोली, गुड़, अक्षत और काला तिल मिलकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें।

4- अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र पढ़ें।

5- अर्घ्य देते समय जल की धारा में देखकर सूर्य देव का दर्शन करना बेहद ही शुभ माना जाता है।

6- इसके बाद सूर्य देव को धूपबत्ती या घी का दीपक दिखाएं और 3 बार परिक्रमा करें।

7- अब भोग अर्पित करने के बाद क्षमा प्रार्थना करें।

सूर्य मंत्र

ॐ सूर्याय नमः

ॐ भास्कराय नमः

ॐ आदित्याय नमः

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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