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Makar Sankranti : मकर संक्रांति की पूजा कैसे करें? नोट कर लें पूजन विधि, स्नान-दान मुहूर्त

Makar Sankranti : मकर संक्रांति की पूजा कैसे करें? नोट कर लें पूजन विधि, स्नान-दान मुहूर्त

संक्षेप:

Makar Sankranti : सूर्य जिस दिन धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे सूर्य का उत्तरायण होना भी कहा जाता है। इसी दिन से शुभ कामों की शुरुआत होती है, इसलिए मकर संक्रांति पर स्नान, पूजा और दान का खास महत्व होता है।

Jan 13, 2026 12:04 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Makar Sankranti : सूर्य जिस दिन धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे सूर्य का उत्तरायण होना भी कहा जाता है। माना जाता है कि इसी दिन से शुभ कामों की शुरुआत होती है, इसलिए मकर संक्रांति पर स्नान, पूजा और दान का खास महत्व होता है। साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। इस दिन सूर्य दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी समय से मकर संक्रांति का पुण्य काल शुरू माना जाता है। दोपहर 3:13 बजे से सूर्यास्त तक का समय स्नान और दान के लिए अच्छा माना जाता है।

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मकर संक्रांति पर स्नान क्यों करते हैं- मकर संक्रांति के दिन स्नान को बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से मन और शरीर दोनों शुद्ध रहते हैं। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही नहाते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिला सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को जल देना अच्छा माना जाता है।

15 जनवरी को भी स्नान-दान किया जा सकता है- ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मकर संक्रांति का मुख्य दिन 14 जनवरी माना जाता है, क्योंकि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद पुण्य काल भी शुरू हो जाएगा। हालांकि, अगर किसी वजह से 14 जनवरी को स्नान-दान या पूजा नहीं हो पाई, तो 15 जनवरी की सुबह स्नान और दान करना भी मान्य माना जाता है। पंडितों का कहना है कि सूर्य निकलने के बाद 15 जनवरी की सुबह किया गया स्नान-दान भी शुभ फल देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के अगले दिन किया गया दान-पुण्य भी बेकार नहीं जाता। खासकर उन लोगों के लिए यह राहत की बात है जो 14 जनवरी को किसी कारण से पूजा-पाठ या दान नहीं कर पाते।

क्या है सही तरीका- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अगर 14 जनवरी को मौका मिले तो उसी दिन स्नान-दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर यह संभव न हो, तो 15 जनवरी की सुबह नहाकर तिल, गुड़ या अनाज का दान किया जा सकता है।

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मकर संक्रांति की पूजा कैसे करें- स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और घर के मंदिर में सूर्य देव को याद करें। तांबे के लोटे में पानी लेकर सूर्य की तरफ देखकर जल चढ़ाएं। इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजें जैसे तिल के लड्डू या खिचड़ी बनाई जाती है। इन्हें भगवान को भोग लगाकर घर के लोगों में बांटा जाता है। पूजा के दौरान बस मन शांत रखें और अच्छी सोच के साथ प्रार्थना करें।

मकर संक्रांति पर दान क्यों जरूरी है- मकर संक्रांति पर दान का भी खास महत्व होता है। इस दिन तिल, गुड़, कंबल, गर्म कपड़े या अनाज दान किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान बहुत पुण्य देता है। दान हमेशा अपनी क्षमता के हिसाब से करना चाहिए। जरूरतमंद की मदद करना ही दान का असली मतलब है।

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इस दिन किन बातों का रखें ध्यान- मकर संक्रांति के दिन कोशिश करें कि किसी से झगड़ा न हो। गलत बोलने या बुरा सोचने से बचें। यह दिन अच्छे काम और अच्छी सोच के लिए माना जाता है।

Yogesh Joshi

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Yogesh Joshi

संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


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