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Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति की कथा, यहां जानें मकर संक्रांति या खिचड़ी से जुड़ी 2 जरूरी बातें

Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति की कथा, यहां जानें मकर संक्रांति या खिचड़ी से जुड़ी 2 जरूरी बातें

संक्षेप:

Makar Sankranti Ki Katha in hindi: आपके मन में कभी न कभी ये सवाल तो जरूर आया होगा कि मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है या इस त्योहार को मनाने कि वजह क्या है? आइए जानते हैं मकर संक्रांति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब-

Jan 13, 2026 04:39 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Makar Sankranti, मकर संक्रांति की कथा: आपके मन में भी कभी न कभी ये सवाल तो जरूर आया होगा कि मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है या इस त्योहार को मनाने के पीछे की वजह क्या है? हर साल जनवरी के महीने में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। यह एक ऐसा त्योहार है, जो दुनियाभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल 14 या 15 तारीख को ही मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ही सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं और खरमास की समाप्ति होती है। मकर संक्रांति का त्योहार पोंगल, बिहू, उत्तरायण और खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है। इस दिन स्नान और दान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति कि कथा और इस पर्व से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब-

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मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथा- भीष्म पितामह और इच्छा मृत्यु का वरदान

मकर संक्रांति पर्व का उल्लेख श्रीमद्भागवत गीता में भी देखने को मिल सकता है। महाभारत काल के दौरान मकर संक्रांति का एक गहरा संबंध भीष्म पितामह से माना जाता है। भीष्म पितामह को अपनी इच्छा के अनुसार मृत्यु का वरदान प्राप्त था। जब वे बाणों की शय्या पर लेटे थे, तब सूर्य 'दक्षिणायन' (अंधकार का समय) में थे। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि दक्षिणायन में शरीर त्यागने पर मोक्ष नहीं मिलता। इसलिए भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के 'उत्तरायण' (मकर संक्रांति) होने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया और उत्तरायण हुए, भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग दिए ताकि उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल सके।

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यहां जानें मकर संक्रांति या खिचड़ी से जुड़ी 2 जरूरी बातें

क्यों नहीं बदलती है मकर संक्रांति की तारीख?

भारतीय व हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकतर हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं। इसी कारण तिथि में बदलाव देखने को मिलता है। वहीं, मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के गोचर पर आधारित है। इसलिए इसकी तारीख लगभग स्थिर (14 या 15 जनवरी) रहती है।

क्या मकर संक्रांति से देवताओं के दिनों कि गणना की जाती है?

शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर्व से ही देवताओं के दिन की गणना की जाती है। सूर्य देव मकर संक्रांति से उत्तरायण में रहते हैं, इस अवधि को दिन कहते हैं। वहीं, सूर्य के दक्षिणायन में रहने कि अवधि को रात्रि कहते हैं। यह 6-6 महीने पर होता है, इसलिए सूर्य का मकर और कर्क गोचर महत्वपूर्ण माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Shrishti Chaubey

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Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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