
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत आज, जानें संपूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
आज मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी दोनों व्रत एक साथ हैं। इस दिन सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा का खास महत्व है। इस लेख में पूजा करने का आसान तरीका, शुभ समय और दान-पुण्य से जुड़े जरूरी काम बताए गए हैं, ताकि आप सही विधि से व्रत और पूजा कर सकें और अच्छा फल प्राप्त कर सकें।
आज यानी 14 जनवरी को धर्म और आस्था के नजरिए से बेहद खास दिन है। आज मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी दोनों व्रत-पर्व एक साथ मनाए जा रहे हैं। पंचांग में भेद के कारण देश के कुछ हिस्सों में मकर संक्रांति 15 जनवरी को भी मनाई जाएगी। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है, जबकि माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी के संयोग में किया गया दान, पूजा और जप अक्षय पुण्य देता है, यानी ऐसा पुण्य जिसका फल लंबे समय तक बना रहता है।
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का महत्व
मकर संक्रांति सूर्य पूजा का पर्व है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, यानी अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ते हैं। यही कारण है कि इस पर्व को नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मक सोच अपनाने का प्रतीक माना जाता है। वहीं षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन तिल से जुड़े छह शुभ कार्य करने का विशेष महत्व होता है।
मुहूर्त-
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 13, 2026 को 03:17 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त - जनवरी 14, 2026 को 05:52 पी एम बजे
पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 07:15 ए एम से 09:21 ए एम
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 08:16 पी एम
मकर संक्रान्ति पुण्य काल - 03:13 पी एम से 05:45 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 32 मिनट्स
मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल - 03:13 पी एम से 04:58 पी एम
अवधि - 01 घण्टा 45 मिनट्स
मकर संक्रान्ति का क्षण - 03:13 पी एम
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो स्नान के पानी में काले तिल और गंगाजल मिला लें। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और सबसे पहले सूर्य देव की पूजा करें। तांबे के लोटे में जल लें, उसमें कुमकुम, चावल और लाल फूल डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। इसके बाद घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। दीपक जलाएं और पीले फूल, फल, तिल और तिल के लड्डू अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
षटतिला एकादशी पर तिल से जुड़े 6 शुभ काम- षटतिला एकादशी पर तिल के छह उपयोग बताए गए हैं-
तिल मिले जल से स्नान
शरीर पर तिल का लेप
पितरों को तिल मिला जल अर्पित करना
भोजन में तिल का सेवन
तिल का दान
तिल से हवन
इन कार्यों को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल, गर्म कपड़े और खिचड़ी का दान करना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को धन का दान भी किया जा सकता है। मकर संक्रांति और एकादशी दोनों ही तिथियां पितरों की तृप्ति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती हैं। तिल से किया गया तर्पण पितरों को शांति देता है।
शाम की पूजा
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
मकर संक्रांति: सूर्य पूजा का पर्व
ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य पंचदेवों में शामिल हैं और सभी शुभ कार्य सूर्य पूजा से शुरू करने की परंपरा है।





