
सफेद या काला मकर संक्रांति पर कौन सा तिल होता है शुभ? जानिए महत्व
इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2026 को मनाना बेहद उत्तम माना गया है। मकर संक्रांति के मौके पर स्नान-ध्यान और दान का महत्व है। इस दिन तिल का उपयोग खास तौर पर किया जाता है। मान्यता है कि इस तिल का दान, तिल से स्नान और तिल-गुड़ के लड्डू खाना बहुत पुण्यदायी बताया गया है।
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व सबसे बड़े त्योहारों में से एक हैं। पंचांग के मुताबिक इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2026 को मनाना बेहद उत्तम माना गया है। मकर संक्रांति के मौके पर स्नान-ध्यान और दान का महत्व है। इस दिन तिल का उपयोग खास तौर पर किया जाता है। मान्यता है कि इस तिल का दान, तिल से स्नान और तिल-गुड़ के लड्डू खाना बहुत पुण्यदायी बताया गया है। लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं, कि काला या सफेद कौन सा तिल इस दिन पूजा में या खाने में प्रयोग करना चाहिए? चलिए इस बारे में जानते हैं।
सफेद तिल
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक धार्मिक अनुष्ठानों में काले तिल और सफेद तिल दोनों का महत्व है। मान्यता है कि दान, स्नान, तर्पण, शनि शांति के लिए आपको काले तिल का प्रयोग किया जाता है। वहीं देव-देवी पूजा, हवन, प्रसाद, मिठाई में सफेद तिल का प्रयोग करें।
काले तिल का महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में काले तिल को शुद्धि और पितृ-तर्पण से जोड़ा गया है। माना जाता है कि ये तिल नकारात्मक ऊर्जाओं को सोख लेता है और साथ ही काला तिल शनि दोष, पितृ दोष और ग्रह शांति के लिए सबसे प्रभावी होता है। वहीं, मकर संक्रांति पर काले तिल इस्तेमाल दान, स्नान और तर्पण में शुभ फलदायी माना गया है। इसका दान महादान कहलाता है। धर्म कहता है कि जो लोग नदी स्नान नहीं कर पाते, वे घर पर तिल मिलाकर स्नान करें तो भी संक्रांति का पूरा फल मिलता है।
मकर संक्रांति के दिन सफेद तिल को हवन, लड्डू, प्रसाद और भोजन में ज्यादा शुभ माना गया है। सफेद तिल जीवन में सौम्यता, संतुलन और सुख का संकेत देता है। यह शुभता का प्रतीक है।
शनि का प्रतीक
ज्योतिष में तिल शनि का प्रतीक है, जबकि गुड़ सूर्य है। मकर संक्रांति का पर्व शनि देव से भी संबंध है। क्योंकि यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष में मकर राशि का संबंध शनि देव से हैं। ऐसे में इस दिन तिल का महत्व और भी बढ़ जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
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