
Makar Sankranti 2026: महाकालेश्वर मंदिर में खास तरीके से मनाई जाएगी मकर संक्रांति, भोग में चढ़ेंगी ये चीजें
मकर संक्रांति के मौके पर मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल का दरबार काफी अलग लगने वाला है। इस खास मौके पर महाकाल को जलाभिषेक खास अंदाज में होगा।
हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व में से एक मकर संक्रांति का विषेश महत्व है। इस खास दिन पर सूर्य ग्रह का गोचर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में होता है। ऐसे में इस दिन को खास माना जाता है और इसे नए शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस दिन किए गए स्नान और दान को काफी फलदायी मानते हैं। ऐसे में देश के प्रमुख घाटों से लेकर मंदिरों तक इस पर्व की रौनक देखने को मिलती है और हर बार की तरह इस बार भी मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भी धूमधाम से इस पर्व को मनाया जाएगा। उज्जैन में इस दिन कई लोग महाकाल का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। इस मौके पर शिप्रा नदी के घाट पर लोगों का सैलाब नजर आता है।
महाकाल के भोग में लगेंगी ये चीजें
इस साल भी मकर संक्रांति के मौके पर सुबह-सुबह ही शिप्रा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचेंगे। स्नान के बाद ही लोग महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर महाकाल के दर्शन करेंगे। इस खास मौके पर महाकाल का अभिषेक तिल के तेल से किया जाएगा। इसके अलावा भगवान को तिल का लड्डू, तिल और शक्कर के कई और पकवान अर्पित किए जाएंगे। मकर संक्रांति के दिन होने वाली भस्म आरती भी खास होने वाली है। आरती के दौरान महाकाल को तिल-गुड़ का भोग लगाया जाएगा और जल में तिल डालकर उन्हें स्नान करवाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें पतंग भी अर्पित की जाएगी।
मकर संक्रांति पर जरूर करें ये काम
बता दें कि मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायन का पर्व भी कहा जाता है। बुधवार और गुरुवार दो दिन षटतिला एकादशी पर महासंयोग बन रहा है। ऐसे में महाकाल के मंदिर में भी इस पर्व का जश्न खास होने वाला है। इस दिन आसपास के पवित्र नदी में स्नान जरूर करना चाहिए। साथ ही सच्चे मन से अगर दान किया जाता है तो माना जाता है कि हर इच्छा पूरी होती है। अगर आपके आसपास कोई नदी नहीं है तो इस दिन नहाने के पानी में थोड़ी सी गंगाजल मिला लें। साथ ही इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना ना भूलें।





