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मकर संक्रांति पर करें सूर्य देव के 108 नामों का जाप, बढ़ेगी सुख-समृद्धि, जानें स्नान-दान का मुहूर्त

मकर संक्रांति पर करें सूर्य देव के 108 नामों का जाप, बढ़ेगी सुख-समृद्धि, जानें स्नान-दान का मुहूर्त

संक्षेप:

ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है इसीलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिv पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। साथ की कुछ उपायों को करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

Jan 10, 2026 02:35 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। दृक पंचांग और अन्य प्रमुख पंचांगों के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार सूर्य देवता से जुड़ा है। ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है इसीलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। साथ ही इस दिन पुण्य काल में पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। साथ की कुछ उपायों को करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इन्हीं में से एक उपाय सूर्य देव के 108 नामों का जाप भी शामिल है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि इस साल मकर संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त कब है और सूर्य के 108 नाम कौन-कौन से हैं।

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पुण्य काल
पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट के आसपास मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। पुण्य काल इसके कुछ घंटे बाद होगा। पुण्य काल में स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान करना शुभ माना जाता है। चूंकि सूर्य का यह गोचर दिन के समय हो रहा है, इसलिए मकर संक्रांति से जुड़े सभी मुख्य पूजा-पाठ और त्योहार 14 जनवरी को ही होंगे। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान कई गुना पुण्य देने वाला होता है।

क्या करें दान
तिल
गुड़
घी
खाने की चीजें (अन्न दान, खिचड़ी)
गर्म कपड़े
धन का दान
इन चीजों के दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

सूर्य के 108 नामों का करें जाप

ॐ भानवे नमः

ॐ असमानबलाय नमः

ॐ अखिलागमवेदिने नमः

ॐ अच्युताय नमः

ॐ अखिलज्ञाय नमः

ॐ अनन्ताय नमः

ॐ इनाय नमः

ॐ अरुणाय नमः

ॐ शरण्याय नमः

ॐ करुणारससिन्धवे नमः

ॐ विश्वरूपाय नमः

ॐ इज्याय नमः

ॐ आर्तरक्षकाय नमः

ॐ आदित्याय नमः

ॐ आदिभूताय नमः

ॐ इन्द्राय नमः

ॐ सुप्रसन्नाय नमः

ॐ सुशीलाय नमः

ॐ सुवर्चसे नमः

ॐ वसुप्रदाय नमः

ॐ इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः

ॐ वन्दनीयाय नमः

ॐ ईशाय नमः

ॐ वसवे नमः

ॐ वासुदेवाय नमः

ॐ उज्ज्वल नमः

ॐ ऊर्ध्वगाय नमः

ॐ विवस्वते नमः

ॐ उद्यत्किरणजालाय नमः

ॐ हृषीकेशाय नमः

ॐ ऊर्जस्वलाय नमः

ॐ उग्ररूपाय नमः

ॐ वीराय नमः

ॐ निर्जराय नमः

ॐ ऋक्षचक्रचराय नमः

ॐ ऋजुस्वभावचित्ताय नमः

ॐ नित्यस्तुत्याय नमः

ॐ ऋकारमातृकावर्णरूपाय नमः

ॐ उज्ज्वलतेजसे नमः

ॐ ऋक्षाधिनाथमित्राय नमः

ॐ जयाय नमः

ॐ ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथये नमः

ॐ ऋषिवन्द्याय नमः

ॐ रुग्घन्त्रे नमः

ॐ लुप्तदन्ताय नमः

ॐ शान्ताय नमः

ॐ कान्तिदाय नमः

ॐ घनाय नमः

ॐ कनत्कनकभूषाय नमः

ॐ खद्योताय नमः

ॐ पुष्कराक्षाय नमः

ॐ आर्तशरण्याय नमः

ॐ एकाकिने नमः

ॐ भगवते नमः

ॐ सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे नमः

ॐ गुणात्मने नमः

ॐ लूनिताखिलदैत्याय नमः

ॐ सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः

ॐ अपवर्गप्रदाय नमः

ॐ शौरये नमः

ॐ दशदिक्संप्रकाशाय नमः

ॐ भक्तवश्याय नमः

ॐ ओजस्कराय नमः

ॐ जयिने नमः

ॐ घृणिभृते नमः

ॐ बृहते नमः

ॐ ब्रह्मणे नमः

ॐ ऐश्वर्यदाय नमः

ॐ शर्वाय नमः

ॐ हरिदश्वाय नमः

ॐ जगदानन्दहेतवे नमः

ॐ जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः

ॐ उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः

ॐ असुरारये नमः

ॐ कमनीयकराय नमः

ॐ अब्जवल्लभाय नमः

ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः

ॐ रवये नमः

ॐ हरये नमः

ॐ परमात्मने नमः

ॐ तरुणाय नमः

ॐ अचिन्त्याय नमः

ॐ आत्मरूपिणे नमः

ॐ अच्युताय नमः

ॐ अमरेशाय नमः

ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः

ॐ अहस्कराय नमः

ॐ वरेण्याय नमः

ॐ ग्रहाणांपतये नमः

ॐ भास्कराय नमः

ॐ नारायणाय नमः

ॐ परेशाय नमः

ॐ श्रेयसे नमः

ॐ सौख्यदायिने नमः

ॐ दीप्तमूर्तये नमः

ॐ निखिलागमवेद्याय नमः

ॐ नित्यानन्दाय नमः

ॐ तेजोरूपाय नमः

ॐ हिरण्यगर्भाय नमः

ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः

ॐ सौख्यप्प्रदाय नमः

ॐ सकलजगतांपतये नमः

ॐ सूर्याय नमः

ॐ कवये नमः

ॐ सम्पत्कराय नमः

ॐ ऐं इष्टार्थदाय नमः

ॐ अं सुप्रसन्नाय नमः

ॐ श्रीमते नमः

सूर्य मंत्र
मकर संक्रांति पर सूर्य देव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। ये हैं कुछ विशेष मंत्र-

1. ओम ऐहि सूर्य सह स्त्रांशों तेजोराशे जग त्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घ्यं नमो स्तुते।।

2. ओम आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।।

3. जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं। तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं।।

4. ओम आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च। हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन।।

5. "ॐ ह्रीं सूर्याय नमः"

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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डिजिटल जर्नलिजम में करीब 6 साल का अनुभव। एजुकेशन, स्पोर्ट्स, टेक-ऑटो और धर्म बीट पर मजबूत पकड़ है। यूट्यूब कंटेंट प्रोड्यूसर व रिपोर्टिंग का भी अनुभव। हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। और पढ़ें
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