महाशिवरात्रि की शाम 6:11 से शुरू होगी शिव पूजा, जानें सुबह से रात तक पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि व उपाय
Mahashivratri Time, Mahashivratri 2026 Puja Muhurat: महाशिवरात्रि के दिन 5 पहर की पूजा करने का विधान है। फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 फरवरी को दोपहर में 12:34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी।

Mahashivratri Time, Mahashivratri 2026 Puja Muhurat: 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है। इस दिन दोपहर में 03:18 बजे तक उत्तराषाढा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र रहेगा। महाशिवरात्रि के दिन 5 पहर की पूजा करने का विधान है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 फरवरी को दोपहर में 12:34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी, जिसका समापन 16 फरवरी को 01:04 बजे तक होगा। ऐसे में त्रयोदशी और चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पर पूजा के शुभ मुहूर्त, भद्रा की टाइमिंग, पूजा विधि, मंत्र और उपाय-
महाशिवरात्रि की शाम 6:11 से शुरू होगी शिव पूजा, जानें सुबह से रात तक पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि व उपाय
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:11 पी एम से 09:38 पी एम
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16
- निशिता काल पूजा समय - 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 06:08 ए एम से 07:04 ए एम
- अभिजित मुहूर्त: 12:45 पी एम से 01:25 पी एम
- विजय मुहूर्त: 02:47 पी एम से 03:28 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त: 06:08 पी एम से 06:36 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या: 06:11 पी एम से 07:34 पी एम
- अमृत काल: 08:29 ए एम से 10:11 ए एम , 05:28 ए एम, फरवरी 16 से 07:08 ए एम, फरवरी 16
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 07:59 ए एम से 03:18 पी एम
महाशिवरात्रि के चौघड़िया मुहूर्त
- चर - सामान्य 09:15 ए एम से 10:32 ए एम
- लाभ - उन्नति 10:32 ए एम से 11:49 ए एम
- शुभ - उत्तम 02:22 पी एम से 03:38 पी एम
- शुभ - उत्तम 06:11 पी एम से 07:54 पी एम
- अमृत - सर्वोत्तम 07:54 पी एम से 09:38 पी एम
- चर - सामान्य 09:38 पी एम से 11:21 पी एम
महाशिवरात्रि पर भद्रा
हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा 12:34 पी एम से 12:53 ए एम, फरवरी 16।
महाशिवरात्रि की पूजा कैसे होगी?
स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। शिव परिवार सहित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक करें और शिव परिवार की विधिवत पूजा-अर्चना करें। अब महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें। फिर घी के दीपक से पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।
महाशिवरात्रि पर कैसे करें रुद्राभिषेक?
संध्या के समय स्नान आदि से निवृत होकर सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें। इसके बाद भगवान शिव, पार्वती सहित सभी देवता और नौ ग्रहों का ध्यान कर रुद्राभिषेक करने का संकल्प लें। मिट्टी से शिवलिंग बनाएं और उत्तर दिशा में स्थापित करें। रुद्राभिषेक करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए इस विधि की शुरुआत करें। सबसे पहले शिवलिंग को गंगाजल से स्नान करवाएं। इसके बाद गन्ने के रस, गाय के कच्चे दूध, शहद, घी और मिश्री से शिवलिंग का अभिषेक करें। हर सामग्री से अभिषेक करने से पहले और बाद में पवित्र जल या गंगाजल चढ़ाएं। प्रभु पर बिल्व पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, काला तिल, भांग, धतूरा, आंक, शमी पुष्प व पत्र, कनेर, कलावा, फल, मिष्ठान और सफेद फूल अर्पित करें। इसके बाद शिव परिवार सहित समस्त देवी-देवताओं की पूजा करें। प्रभु को भोग लगाएं। अंत में पूरी श्रद्धा के साथ शिव जी की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें। इस क्रिया के दौरान अर्पित किया जाने वाला जल या अन्य द्रव्यों को इकट्ठा कर घर के सभी कोनों और सभी लोगों पर छिड़के और इसे प्रसाद स्वरूप में भी ग्रहण कर सकते हैं। रुद्राभिषेक खासतौर पर विद्वान् पंडित से करवाना अत्यंत सिद्ध माना जाता है। हालाँकि, आप स्वयं भी रुद्राष्टाध्यायी का पाठ कर इस विधि को संपूर्ण कर सकते हैं।
नोट करें- शिव जी का रुद्राभिषेक करते समय शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
शिव मंत्र
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
महाशिवरात्रि के उपाय
दही और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करें और श्री शिव चालीसा का पाठ करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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