Hindi Newsधर्म न्यूज़Mahashivratri: Shiva Sadhana and Shavasadhana to the unique and amazing Aghaddani Shiva read about him
सदा सहाय शिव सहज लुभाएं, अनोखे-अद्भुत औघड़दानी शिव के बारे में पढ़ें

सदा सहाय शिव सहज लुभाएं, अनोखे-अद्भुत औघड़दानी शिव के बारे में पढ़ें

संक्षेप:

महाशिवरात्रि : शिव भारत के महादेव हैं। इस अर्थ में महोदव हैं कि बसते हैं कैलाश में, पर रमते हैं समूचे भारतवर्ष में। जंगलों में, नदियों के किनारे, समुद्र के बीच में और पहाड़ों की चोटियों पर अपना डेरा जमा लेते हैं।

Feb 10, 2026 08:55 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, विद्यानिवास मिश्र
share Share
Follow Us on

आशुतोष शिव भारतीय मन को सहज ही लुभाते हैं। ऐसे देवता से जुड़कर हर एक मन महीप बना रहता है। कभी अनुभव नहीं करता कि वह कहीं से हीन है। हाथ में भिक्षा-पात्र, पर औघड़दानी ऐसे कि कोई खाली हाथ लौटा नहीं, मनमाना लेकर गया। महाशिवरात्रि का पर्व आदि देव महादेव को याद करते हुए स्वयं सदाशिव हो जाने का दिन है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

अनोखे-अद्भुत औघड़दानी

जरूरी नहीं कि वहां मंदिर खड़ा हो जाए। कभी वह पेड़ के नीचे आराम करते मिल जाएंगे। कभी नदी के बीच पत्थरों के साथ केलि करते मिल जाएंगे। कभी घर-आंगन में छोटी-सी कांसे की थाली में कुछ क्षणों के लिए विराज जाएंगे और कभी केवल बमभोला के बोल में। कभी गीत में, कभी नृत्य में। कभी पत्थर में, कभी सोने में। कभी मिट्टी में, कभी पानी में। कभी वायु में, कभी प्राणों के साथ जपे जाते बीज में। कहां पहुंच जाएंगे, कुछ ठिकाना नहीं।

चिता की भस्म को विभूति और विभूति को भस्म बनाते उन्हें देर नहीं लगती। श्मशान उनके खेल का मैदान है। मृत्यु उनके कंठ की शोभा है। विश्व के मोहक सौंदर्य की कला उनके ललाट की शोभा है। भय को उन्होंने बांहों में, गले में पहन रखा है। दिशाएं उनका वस्त्र हैं।

कुछ नहीं होना ही ऐश्वर्य

हाथ में भिक्षा-पात्र, पर औघड़दानी ऐसे कि कोई खाली हाथ लौटा नहीं, मनमाना लेकर गया। तुलसीदास के विधाता ब्रह्मा घबरा उठे और पार्वती से कहा कि क्या तुम्हारे ये पति देवता बौरा गए हैं, जिन अभागों के ललाट में सुख का चिह्न भी नहीं लिखा था, उनको स्वर्ग भेजते-भेजते नाकों दम है। यह अधिकार दूसरे को सौंपिए, इससे अच्छा तो भीख मांगकर जीना है।

भारत का मन ऐसे बौराए देवता पर सहज लुभा जाता है और ऐसे देवता से जुड़कर ही हर एक मन महीप बना रहता है। कभी अनुभव नहीं करता कि वह कहीं से हीन है। जो अपने को हीन अनुभव करता है, वह फिर इस महादेव से जुड़ा नहीं, क्योंकि जो जुड़ेगा, वह सहज ही समझ लेगा कि अकिंचनता ही तो ऐश्वर्य है। न कुछ होना ही ऐश्वर्य को निमंत्रण है।

शिवसाधना और शवसाधना में कोई फर्क नहीं है। श में इ की शक्ति की मात्रा भर लगा दें, शिवसाधना हो जाए। जो कुछ जड़ है, मृत है, सोया है, उसमें शक्ति है। उसमें भी चैतन्य-प्रतिभा है, उसे पहचानो। बस, शिव उपस्थित हो जाएंगे, सौम्य रूप में। जो उसे नहीं पहचानते, जो अपनी शक्ति नहीं पहचानते या फिर अपनी शक्ति को निजी शक्ति मानते हैं, उनके लिए शिव महाकाल है, महारुद्र हैं, प्रलयंकर हैं, अघोर भैरव हैं।

सब कुछ बांटते चलो

शिव का ध्यान इस देश की मिट्टी, नदी, आग, हवा और आसमानी रंगत का ध्यान है। इस देश के मन, इस देश की इतनी परिपक्व बुद्धि और इस देश की स्मिता का ध्यान है। इस देश की महाशक्ति के साथ रचे हुए एक ऐसे मंगल का ध्यान है, जिसमें हिमालय की रत्न संपदा न्योछावर हो जाती है। प्रकाश के रूप देवता अघा जाते हैं। अंधकार के रूप प्रेत-बेेताल अघा जाते हैं। नाग मणिहार बन जाता है। गंगा मालती माल बन जाती है।

दुकूल बारात विदा होती है, तो हिमालय अकिंचन हो जाते हैं। उनके पास बिटिया को देने के लिए बस रह जाता है बावन हंडा सोहाग। शंकर चिंतित हो जाते हैं कि बाप रे बाप, पार्वती वैसे ही बड़ी गुमान वाली, बावन हंडा सोहाग लेकर चलेंगी, तो बस इन्हीं की चलेगी। उन्होंने चाल चली कि बूढ़ा बैल है, इतना सोहाग ले जाकर क्या करोगी, रास्ते में बांटती चलो।

शिव-शक्ति का संतुलन

लोक में कथा है, तपसी स्त्रियों ने नहीं लिया। रानियों ने नहीं लिया। लिया तो साग-सब्जी बेेचने वाली स्त्रियों ने। खटने वाली धाेबिनों ने ओर उन सबने जिनको हम सतीत्व की मर्यादा नहीं देते। सबने सोहाग पाया। शिव निश्चिंत हुए कि अब पार्वती कुछ वश में रहेंगी। पर जितने भी हंडे बच रहे थे, उनका पुण्य प्रताप, चलती है पार्वती की ही। शिव के हाथ में चाभी नहीं है और प्रतिदिन ये भूखे-नंगे की ओर से खप्पर लिए पहुंच जाते हैं, अन्नपूर्णा, पेट भरो। कितनी भूख निवारती हैं भवानी और थकती नहीं।

शिव का स्मरण गृहस्थी

शिव का स्मरण गृहस्थी के सुख का स्मरण है। जहां गृहिणी सब कुछ है, उसी के बलबूते पर, उसकी उदारता और उसकी सौभाग्य-महिमा के बल पर संसार चलता है। एक ऐसे घर का स्मरण है, जो सबका घर है और किसी एक का घर नहीं है। जो बच्चों के लड़ने-झगड़ने से भरा-पूरा रहता है और जो घरवाले की निश्चिंतता में मस्ताया रहता है। इस सामान्य घरेलू जीवन को सहज भाव से लेना, इसके सुख-दुख को, हर्ष-विषाद को, राग-द्वेष को और ज्ञान-अज्ञान को, दिन-रात को ऐसे लेना कि ये सब प्रकाश के ही खेल हैं। अंधकार भी प्रकाश की ही लीला है। मृत्यु भी जीवन के छंद की यति है, एक विरामचिह्न है, उससे जीवन का वाक्यार्थ लगता है।

शिव का तांडव

शिव का तांडव, शक्ति के संतुलन के लिए और देवी का लास्य, शिव की सरसता के आवाहन के लिए होता है। यदि इतना ही हम आज शिवरात्रि के दिन स्मरण करें कि यह रात शिव-पार्वती के सोहाग की ही रात नहीं, यह विश्व-सृष्टि के बीच संवाद की स्थिति लाने वाली, व्यष्टि-समष्टि के बीच समरसता स्थापित करने वाली उत्सव रात्रि है। इसका एक-एक क्षण चिन्मय प्रकाश की ताल पर नाच रहा है। एक-एक क्षण अपूर्व उल्लास की नई हिलोर है, तो हम शिव को उस उल्लास में पा लेंगे।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ , Aaj ka Rashifal,Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!