महाशिवरात्रि पर मंदिर नहीं जा पाए, तो घर बैठे ऐसे करें भगवान शिव की पूजा, नोट कर लें संपूर्ण पूजन विधि
महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे पवित्र रात्रि है। इस दिन शिव जी की पूजा से सभी पाप नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अगर किसी कारणवश आप मंदिर या शिवालय नहीं जा पा रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है।

महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे पवित्र रात्रि है। इस दिन शिव जी की पूजा से सभी पाप नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अगर किसी कारणवश आप मंदिर या शिवालय नहीं जा पा रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान शिव मंदिरों में ही नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ घर में भी वास करते हैं। घर पर ही विधि-विधान से पूजा करने से वही पुण्य और कृपा प्राप्त होती है, जो मंदिर में होती है। जरूरी है मन की पवित्रता, विश्वास और पूर्ण समर्पण। आइए जानते हैं घर पर महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें।
पूजा के लिए तैयारी और स्नान
महाशिवरात्रि की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। अगर संभव हो तो नदी या तालाब में स्नान करें, अन्यथा घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ और नए वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं और उस पर शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के लिए घी का दीपक, अगरबत्ती, फूल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई तैयार रखें।
अभिषेक और मुख्य पूजा
पूजा की शुरुआत गणेश जी के ध्यान और 'ॐ गणेशाय नमः' मंत्र से करें। फिर भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें। अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जप करें। इसके बाद बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र तीन पत्तियों वाला होना चाहिए। धतूरा, भांग, आक के फूल और शमी पत्र भी चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाएं और सिंदूर से श्रृंगार करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र या शिव पुराण का पाठ करें।
रात्रि जागरण और निशिता पूजा
महाशिवरात्रि की रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। रात में चारों प्रहर पूजा करें। निशिता मुहूर्त में विशेष अभिषेक और आरती करें। इस समय 'ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥' महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। यह मंत्र स्वास्थ्य, दीर्घायु और कष्ट निवारण के लिए अत्यंत शक्तिशाली है। रात्रि में भजन-कीर्तन करें और शिव कथा सुनें।
विशेष उपाय और अर्पण
महाशिवरात्रि पर घी का दीपक अवश्य जलाएं। शाम को या रात्रि 9 बजे के समय शिवलिंग के समक्ष घी का दीपक जलाएं। दीपक की बत्ती सफेद रुई की हो। 8 या 12 मुखी दीपक जलाने से अक्षय पुण्य मिलता है। बेलपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर अर्पित करें। गरीबों को दान दें। संभव हो तो काले तिल, उड़द की दाल या कंबल दान करें।
व्रत और पारण के नियम
महाशिवरात्रि का व्रत निर्जला या फलाहारी रखा जाता है। अनाज, नमक, चावल, दाल, मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन से परहेज करें। फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा आदि ग्रहण करें। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करें। पारण में सात्विक भोजन या फल लें।
महाशिवरात्रि पर घर बैठे पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। सच्ची भक्ति से की गई पूजा मंदिर से कम नहीं होती। इस दिन की गई साधना अक्षय फल देती है।





