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15 फरवरी या 16 महाशिवरात्रि कब है? पार्थिव शिवलिंग क्या है, कैसे बनता है, शिवरात्रि पर इसकी पूजा का महत्व क्या है ?

15 फरवरी या 16 महाशिवरात्रि कब है? पार्थिव शिवलिंग क्या है, कैसे बनता है, शिवरात्रि पर इसकी पूजा का महत्व क्या है ?

संक्षेप:

Mahashivratri kab hai: सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा को महाशिवरात्रि पर उत्तम माना गया है। महाशिवरात्रि पर चार पूजा का खास महत्व है। इसके अलावा इस दिन पार्थिव शिवलिंग का पूजन भी फलदायी माना जाता है। पार्थिव शिवलिंग क्या होता है

Feb 12, 2026 01:20 pm ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा को महाशिवरात्रि पर उत्तम माना गया है। महाशिवरात्रि पर चार पूजा का खास महत्व है। इसके अलावा इस दिन पार्थिव शिवलिंग का पूजन भी फलदायी माना जाता है। पार्थिव शिवलिंग क्या होता है और कैसे इसे बनाया जाता है। इसके अलावा 15 और 16 शिवरात्रि तिथि को लेकर क्या कंफ्यूजन है, यह सब आप यहां से पढ सकते हैं। भगवान शिव की अधिकतर पूजा प्रदोष काल में यानी सुबह और शाम के मिलते वक्त होती हैं। इसलिए महाशिवरात्रि की पूजा भी प्रदोष काल में करनी चाहिए।

क्या होता है पार्थिव शिवलिंग, इसे कैसे बनाएं,

पार्थिव शिवलिंग वो शिवलिंग जो घर पर मिट्टी, आटा, गाय के गोबर, फूल, कनेरपुष्प, फल, गुड़, मक्खन, भस्म अथवा अन्न से भी अपनी रुचि के अनुसार शिवलिंग बनाकर तैयार किया जाता है और फिर उसका पूजन किया जाता है। नदी या तालाबके किनारे, शिवालय में अथवा और किसी पवित्र स्थान में पार्थिव-पूजा करने का विधान है। शुद्ध स्थान से निकाली हुई मिट्टीको लाकर बड़ी सावधानीके साथ शिवलिंगका निर्माण करना चाहिए। मिट्टी में दूध मिलाकर शोधन करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह रखकर शिवलिंग बनाना चाहिए।अंगुल से ऊंचा नहीं होना चाहिए। इससे ज्यादा ऊंचा होने पर पूजन का पुण्य नहीं मिलता।शिवलिंग पर चढ़ाई हुई चीजें ग्रहण नहीं करनी चाहिए।

पार्थिव शिवलिंग की पूजा का क्या महत्व है

महाशिवरात्रि पर पार्थिव लिंग बनाकर शिव पूजन करना भी उत्तम होता है। शिव महापुराण में इसका महत्व बताया गया है। इसमें लिखा है, जो भी पार्थिव शिवलिंग से पूजन करता है, वो से धन, धान्य, आरोग्य और पुत्र सब पाता है। पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है। शिवजी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन महिला और पुरूष दोनों कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि कब है, तिथि को लेकर कंफ्यूज ना हों?

फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाते हैं। इस साल चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम को मिल रही है, इसलिए शिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। 16 फरवरी को आधे दिन चतुर्दशी तिथि मिलेगी, इसलिए इस दिन व्रत नहीं रखा जाएगा। आपको बता दें कि भगवान शिव की अधिकतर पूजा प्रदोष काल में यानी सुबह और शाम के मिलते वक्त होती हैं। इसलिए महाशिवरात्रि की पूजा भी प्रदोष काल में करनी चाहिए। इस दिन रात में जागकर भगवान शिव को पूजा बहुत ही फलदायी होगी? इसे निशीथ काल की पूजा समय कहते हैं, जो इस साल 15 फरवरी को रात्रि को 11:52 से लेकर अगले दिन 16 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 12:42 बजे तक रहेगा। इसके अलावा चाहर पहर का समय भी इस प्रकार है। पहला प्रहर: शाम 06:01 से रात्त में 09:09 बजे तक

दूसरा प्रहर: रात में 09:09 से लेकर 16 फरवरी 2026 को 00:17 बजे तक

तीसरा प्रहर: 16 फरवरी 2026 को देर रात 00:17 से लेकर 03:25 बजे तक

चौथा प्रहर: 16 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 03:25 से लेकर प्रात: 06:33 बजे तक

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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