Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए और कौन सा मंत्र पढ़ें? जानिए सही तरीका

Feb 14, 2026 09:46 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के साथ ही शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है और शिवलिंग पर लोग जल, दूध, भांग, धतूरा, बेर, ठंडाई समेत कई चीजें चढ़ाते हैं। इसके अलावा भगवान शिव को बेलपत्र भी अर्पित किया जाता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए और कौन सा मंत्र पढ़ें? जानिए सही तरीका

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस साल यह पर्व आज यानी 15 फरवरी को मनाई जा रही है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ है। अन्य मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान शिव फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि वाले दिन ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट हुए थे। ऐसे में इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के साथ ही शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है और शिवलिंग पर लोग जल, दूध, भांग, धतूरा, बेर, ठंडाई समेत कई चीजें चढ़ाते हैं। इसके अलावा भगवान शिव को बेलपत्र भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को काफी प्रिय। लेकिन लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए। चलिए जानते हैं कि बेलपत्र किस तरीके से चढ़ाना चाहिए?

क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र?
भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका जानने से पहले हमें ये जानना होगा कि आखिर शिव जी को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के मुताबिजब समुद्र मंथन हुआ, तब विष (कालकूट) निकला जिसे भगवान शिव ने पी लिया। विष के प्रभाव से शिवजी का शरीर जलने लगा। तब देवताओं और ऋषियों ने शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाया, जिससे उनकी जलन शांत हुई। तभी से शिवजी को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हो गए। वहीं, दूसरी कथा के मुताबिक माता पार्वती ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और बेलपत्र अर्पित किए। प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। तब से यह मान्यता बन गई कि बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

कितने पत्ते चढ़ाने चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बेल के वृक्ष का संबंध गुरु (बृहस्पति) ग्रह से माना जाता है। साथ ही बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) क प्रतीक मानी जाती हैं। ये तीन गुणों, सत्त्व, रज और तमका भी प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में बेलपत्र चढ़ाने से साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं। ऐसे में मान्यतानुसार शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। आप चाहे तो इससे ज्यादा बेलपत्र भी चढ़ा सकते हैं। लेकिन, कम से कम तीन बेलपत्र तो हमें जरूर शिवलिंग पर अर्पित करने चाहिए। ऐसी मान्यता है कि आप केवल 1 बेलपत्र भी चढ़ा सकते हैं, जिसमें 3 पत्तियां जुड़ी हो।

चढ़ाने की विधि
- शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले इसे साफ पानी से धो लें।
- इसके बाद चिकनी सतह को शिवलिंग से स्पर्श कराएं।
- इस दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके अलावा आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं- “बिल्वपत्रस्य दर्शनं, स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोर पाप संहारं, बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥”
- बेलपत्र चढ़ाते समय हमेशा यह ध्यान रखें कि जो पत्ती का ऊपरी हिस्सा है जिसमें एक पॉइंट बनता है वह कभी भी टूटा हुआ ना हो।
- इसके अलावा बेलपत्र कहीं से फटा ना हो और उस पर ज्यादा धारियां ना हों।
- आप चंदन से बेलपत्र पर टीका लगा सकते हैं या फिर ॐ लिख सकते हैं।

बेल पत्र चढ़ाने के लाभ
- शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से पापों का नाश होता है।
- जो बेल वृक्ष के नीचे शिव लिंग की पूजा करता है, वो मोक्ष को प्राप्त करता है।
- बेलपत्र अर्पित करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है।
- आर्थिक उन्नति होती है।
- जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!