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मनकामेश्वर मंदिर: 'काम' को भस्म करके भगवान शिव स्वयं यहां हुए हैं विराजमान, दर्शन मात्र से पूर्ण होती है मनोकामान

मनकामेश्वर मंदिर: 'काम' को भस्म करके भगवान शिव स्वयं यहां हुए हैं विराजमान, दर्शन मात्र से पूर्ण होती है मनोकामान

संक्षेप:

Mahashivratri 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक ऐसा भगवान शिव का मंदिर है जहां महाशिवारात्रि के दिन भोले बाबा के भक्त हजारों की में आते हैं। यहां पूरे दिन भक्त को भीड़ रहती है। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं है। चलिए जानते हैं कि भगवान शिव का यह मंदिर कौन सा है।

Feb 11, 2026 01:31 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन उनकी उपासना की जाती है। यह पर्व आते ही शिवायलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उत्तर प्रदेश के मंदिरों की बात की जाए, तो यहां कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारिक शिव मंदिर हैं, जहां महाशिवरात्रि के दिन भक्तों की विशेष भीड़ देखी जाती है। क्योंकि इन मंदिरों की अपनी मान्यताएं हैं। प्रयागराज में एक ऐसा ही भगवान शिव का मंदिर है जहां महाशिवारात्रि के दिन भोले बाबा के भक्त हजारों की में आते हैं। यहां पूरे दिन भक्त को भीड़ रहती है। चलिए जानते हैं कि भगवान शिव का यह मंदिर कौन सा है।

मनकामेश्वर मंदिर, प्रयागराज
दरअसल, हम बात कर रहे हैं मनकामेश्वर महादेव मंदिर की, जो प्रयागराज में यमुना के उत्तरीतट पर स्थित है। यह मंदिर प्रयागराज किला के करीब है। यहां भगवान शिव का लिंग प्रतिस्थापित है। इस में महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक, महाभिषेक, महामृत्युंजय जाप कराने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में सिर्फ दर्शन करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही यहां दर्शन-पूजन से शारीरिक, मानसिक कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इस मंदिर यानी कामेश्वर पीठ का जिक्र पुराणों में मिलता है। इसी धाम में 'काम' को भस्म करके भगवान शिव स्वयं विराजमान हुए हैं। मनकामेश्वर मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित है।

श्रीराम ने की थी पूजा-अर्चना
एक कथा के मुताबिक त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्षण के साथ वनवास जा रहे थे, तब श्रीराम ने ने मनकामेश्वर मंदिर में शिवजी की पूजा-अर्चना की थी। साथ ही उन्होंने जलाभिषेक कर अपने मार्ग में आने वाली तमाम विघ्न-बाधाओं को दूर करने की कामना की थी। इसलिए इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से अगर शिव जी की पूडा अर्चना की जाए, तो जीवन में विघ्नों का नाश होता है और मनोकानाएं भी पूर्ण होती है। यही वजह है कि यहां भक्तों की सावन और महाशिवरात्रि के वक्त भीड़ देखी जाती है।

चित्रकूट की ओर रवाना
मान्यता है यहां विश्राम कर भगवान श्री राम चित्रकूट की ओर गए थे। साथ ही इस मंदिर को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि अकबर की पत्नी जोधाबाई जब प्रयागराज आईं , तब वो किले के निकट स्थित इस मंदिर की पूजा अर्चना की थी।

शृणमुक्तेश्वर मंदिर और हनुमाम जी की प्रतिमा भी है
मनकामेश्वर मंदिर के परिसर में ही शृणमुक्तेश्वर मंदिर है। यहां पर संगम में स्नान करने के बाद पूजन करने से पिशाच बाबा से मुक्ति मिलती है। इसलिए इसे पिशाचमोचन भी कहते हैं। यहां पर दर्शन करने से यदि किसी का पिशाच योनि में जन्म हुआ हो तो मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इसके पश्चिम में कामतीर्थ है यहां दर्शन करने से काम भावनाओं पर भी नियंत्रण होता है और मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में एक हनुमान जी की दक्षिणामुखी प्रतिमा भी है। शिव जी के साथ भक्त उनके दर्शन के लिए भी आते हैं।

यहां कैसे पहुंचे
अगर आप भी इस महाशिवरात्रि प्रयागराज के मनकामेश्वर के दर्शन करने चाहते हैं या फिर यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर प्रयागराज जंक्शन से लगभग 5-7 किमी और रामबाग रेलवे स्टेशन से भी करीब है। मुख्य शहर से ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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