Mahashivratri 2026 Shiving Puja: जलाभिषेक कब शुभ, महाशिवरात्रि पर क्या चढ़ाएं जो हो लक्ष्मी प्राप्ति और धन लाभ
shivling par kya chadaye: आज अगर आप भोले नाथ की पूजा कर रहे हैं और मन में लक्ष्मी प्राप्ति की चाह भी हैं, तो आपको शिवलिंग पर इन चीजों को अर्पित करना चाहिए। इन चीजों का जिक्र शिवमहापुराण में भी किया गया है।

shivling par kya chadaye: आज अगर आप भोले नाथ की पूजा कर रहे हैं और मन में लक्ष्मी प्राप्ति की चाह भी हैं, तो आपको शिवलिंग पर इन चीजों को अर्पित करना चाहिए। इन चीजों का जिक्र शिवमहापुराण में भी किया गया है। महाशिवरात्रि माघ माह के चतुर्दशी तिथि को मनाने की परंपरा है। 15 फरवरी की शाम 5 बजे के बाद चतुर्दशी तिथि चढ़ रहा है। इस दिन शाम 7.48 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है, इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हो रहा है। शिवभक्त इस बार महाशिवरात्रि का उपवास उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र में रखेंगे।
महाशिवरात्रि पर कब करें जलाभिषेक
भगवान शिव व पार्वती की पूजा 15 फरवरी की मध्य रात्रि में निशिता काल की पूजा श्रद्धालु करेंगे। ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते हैं कि भगवान शिव का जलाभिषेक शिवभक्त शाम साढ़े छह बजे के बाद करने पर उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होगी।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं
शिवमहापुराण में लिखा है कि लक्ष्मीप्राप्ति के लिए शिवलिंग क्या -क्या अर्पित करना चाहिए। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर लक्ष्मी प्राप्ति की इच्छावाले को कमल, बिल्वपत्र, शतपत्र और शंखपुष्प से भगवान् शिवकी पूजा करनी चाहिए । अगर एक लाखकी संख्या में इन पुष्पों द्रारा भगवान् शिव को पूजा की जए, तो सारे पापोंका नाश होता है और लक्ष्मी की भी प्राप्ति हो जाती है, इसमें कोई भी शक नहीं है। कमलोंका एक प्रस्थ बताया गया है और एक सहस्त्र बिल्वपत्रोंका आधा प्रस्थ कहा गया है । एक सहस्र शतपत्रसे आधे प्रस्थकी परिभाषा को गयी है। सोलह पलोंका एक प्रस्थ होता है और दस टंकोंका एक पल। जब इसे पत्र, पुष्प आदिको तुला पर रखे, तो वह आपकी मनोकामना पूरी कर देता है और अगर निष्काम भावनासे है, तो वह शिवस्वरूप हो जाता है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि महादेवके ऊपर परम भक्ति से अखण्डित चावल चढ़ाने से मनुष्योंकी लक्ष्मी बढ़ती है। साढ़े छः प्रस्थ और दो पलभर चावल संख्या में एक लाख हो जाते है। रद्रप्रधान मन्त्र से पूजा करके भगवान् शिवके ऊपर बहुत सुन्दर वस्त्र चढाएं और उसी पर चावल रखकर समर्पित करे, तो उत्तम है। इसके बाद उसके ऊपर गन्ध, पुष्प आदिके साथ एक श्रीफल चढ़ाकर धूप आदि निवेदन करे, तो पूजाका पूरा-पूरा फल प्राप्त होता है।
प्रथम प्रहर पूजा विधि शिवलिंग का जल और दूध से अभिषेक करें।
द्वितीय प्रहर पूजा विधि शिवलिंग का दही और घी से अभिषेक करें।
तृतीय प्रहर पूजा विधि भगवान शिव का शहद और शक्कर मिले जल से अभिषेक करें।
चतुर्थ प्रहर पूजा विधि शिवलिंग का गंगाजल या शुद्ध जल से अंतिम अभिषेक करें।





