Mahashivratri 2026: देवघर के वैद्यनाथ मंदिर में बेहद खास होती है महाशिवरात्रि, जानिए इस दिन की पूरी परंपरा
झारखंड का देवघर बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। महाशिवरात्रि यहां के लिए सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।

झारखंड का देवघर बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। यह धाम केवल शिव का निवास नहीं, बल्कि शक्तिपीठ भी है, जहां शिव और शक्ति का अद्भुत संगम है। महाशिवरात्रि यहां के लिए सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं। मंदिर का पूरा वातावरण 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठता है। महाशिवरात्रि 2026 में 26 फरवरी को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस दिन की खास परंपराएं और महत्व।
बैद्यनाथ धाम का धार्मिक महत्व
बैद्यनाथ धाम को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। पुराणों के अनुसार, सती के हृदय का गिरना यहां हुआ था, इसलिए इसे हृदय पीठ भी कहते हैं। शिव यहां वैद्यनाथ रूप में विराजमान हैं और माता पार्वती उनकी अर्धांगिनी के रूप में हमेशा उपस्थित रहती हैं। महाशिवरात्रि को शिव-पार्वती विवाह का पर्व माना जाता है। इस दिन पूजा करने से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा-अर्चना
महाशिवरात्रि के दिन बैद्यनाथ धाम में चार प्रहर विशेष पूजा होती है।
- प्रथम प्रहर (रात्रि 9 बजे से 12 बजे) – शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक।
- द्वितीय प्रहर (12 बजे से 3 बजे) – बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाए जाते हैं।
- तृतीय प्रहर (3 बजे से 6 बजे) – रुद्राभिषेक और शिव पुराण पाठ।
- चतुर्थ प्रहर (6 बजे से सुबह) – निशिता काल में विशेष आरती और जागरण।
पूजा षोडशोपचार विधि से होती है। तीर्थपुरोहित मंत्रोच्चार करते हैं। भक्त रात्रि जागरण करते हैं।
मोर मुकुट अर्पण की अनोखी परंपरा
साल में केवल महाशिवरात्रि के दिन ही बैद्यनाथ धाम के शिखर पर मोर मुकुट चढ़ाया जाता है। यह परंपरा बहुत पुरानी है। जिनकी शादी में देरी हो रही हो, रिश्ते बनते-बनते टूट रहे हों या विवाह संबंधी बाधा हो, वे इस दिन मोर मुकुट अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से विवाह की सभी रुकावटें दूर होती हैं और मनचाहा वर या वधू मिलता है। यह परंपरा केवल देवघर बैद्यनाथ धाम में ही देखने को मिलती है।
गठबंधन परंपरा से वैवाहिक जीवन में मधुरता
महाशिवरात्रि पर गठबंधन परंपरा भी बहुत प्रसिद्ध है। जिनके वैवाहिक जीवन में तनाव, मनमुटाव या कलह चल रही हो, वे पति-पत्नी एक-दूसरे के हाथ में गठरी बांधते हैं। फिर शिव-पार्वती से प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इससे रिश्ते में प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक सुख-शांति बनी रहती है। यह परंपरा भी केवल बैद्यनाथ धाम की विशेषता है।
महाशिवरात्रि पर अन्य विशेष पूजा
महाशिवरात्रि पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है। बाबा बैद्यनाथ का विशेष शृंगार किया जाता है। भक्त सुबह से ही कतारों में लग जाते हैं। दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाए जाते हैं। शिव पुराण पाठ, रुद्राभिषेक और आरती होती है। इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
देवघर बैद्यनाथ धाम महाशिवरात्रि पर आस्था का महासागर बन जाता है। मोर मुकुट और गठबंधन जैसी अनोखी परंपराएं यहां की विशेषता हैं। श्रद्धा से पूजा करने पर बाबा बैद्यनाथ हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
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