Mahashivratri 2026: शिव मंदिर से लौटते वक्त 90% लोग करते हैं ये गलती, जान लें लोटे से जुड़ा सही नियम

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बनती है। हर कोई श्रद्धा भाव के साथ शिवलिंग को पूजता है। हालांकि ज्यादातर लोग शिव मंदिर से लौटते वक्त एक कॉमन गलती कर बैठते हैं। 

Mahashivratri 2026: शिव मंदिर से लौटते वक्त 90% लोग करते हैं ये गलती, जान लें लोटे से जुड़ा सही नियम

भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह के उत्सव को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की पूजा का फल साल भर में पड़ने वाली 12 शिवरात्रियों के बराबर होता है। इस खास दिन शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव के साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं। साथ ही चार प्रहर की पूजा को भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंदिरों और शिवालयों में इस दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। हर कोई अपने-अपने तरीके से भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश करता है। हालांकि शिव मंदिर से लौटते वक्त एक ऐसी कॉमन गलती है जोकि लगभग 90 प्रतिशत लोग कर बैठते हैं। नीचे विस्तार से जानें कि आखिर ये कॉमन गलती क्या है? कहीं आप भी तो अनजाने में ये गलती नहीं कर रहे हैं?

शिवमंदिर से लौटते वक्त ना करें ये गलती

बता दें कि ये कॉमन गलती लोटे से जुड़ी हुई है। दरअसल जिस लोटे से भगवान शिव को जल अर्पित किया जाता है, उसे कभी भी खाली नहीं लाना चाहिए। माना जाता है कि खाली लोटा घर लाने का साफ-साफ मतलब है कि आप अपने साथ दरिद्रता लेकर आ रहे हैं। ऐसे में शिवमंदिर से लौटते वक्त हमेशा जलाभिषेक वाले लोटे को गलती से भी खाली वापस नहीं ले जाना चाहिए। आप लौटे में शिवलिंग वाले जल को थोड़ा सा उस लोटे में रख लें। इसके अलावा आप मंदिर में मिलने वाले अक्षत या फिर फूल को उस लौटे में रखकर ही घर वापस आएं। धार्मिक मान्यता के हिसाब से इस जल को पूरे घर में छिड़क देने से हर तरह की नेगेटिविटी मिट जाती है। माना जाता है कि इससे घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आती है।

ध्यान में रखें मंदिर से जुड़ी ये बातें

कुछ और भी नियम हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है कि ये नियम सिर्फ शिव मंदिर ही नहीं बल्कि किसी भी देवी-देवता के मंदिर में अपना सकते हैं। जब भी आप मंदिर से वापस लौटे तो इस दौरान कभी भी घंटी ना बजाएं। इसे हमेशा मंदिर में प्रवेश करते समय ही बजाया जाता है। इसके अलावा घर आते ही तुरंत हाथ-पैर धोने की बजाए कुछ देर शांत भाव से बैठ जाए। माना जाता है कि इससे आपकी और आपके आसपास की एनर्जी काफी अच्छी हो रहेगी। वहीं मंदिर से मिले प्रसाद, फूल माला को पहले घर में पूजा वाली जगह पर थोड़ी देर के लिए रख दें। बाद में आप इसे गमले में डाल सकते हैं। नहीं तो आप किसी नदी या फिर बहते हुए जल में प्रवाह कर सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि इन पवित्र चीजों को कभी भी गंदी जगह पर रखने की गलती ना करें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!