अगर महाशिवरात्रि पर महाकाल भस्म आरती में शामिल होने जा रहे हैं, तो ये नियम पढ़कर जाएं
Mahashivratri 2026: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में कुल 6 बार आरती की जाती है, लेकिन भस्म आरती का खास महत्व होता है। इसमें शामिल होने के दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन महिलाओं को इस आरती से दूर रखा जाता है। इसके अलावा भस्म आरती से जुड़े कई नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है।

महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देशभर में मनाया जाता है। लेकिन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस पर्व को बेहद पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। यहां महाशिवरात्रि पहले से ही शिव नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक मंदिर में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाता है और हर दिन भगवान शिव के अलग-अलग स्वरूपों का दर्शन होता है। साथ ही यहां की आरती लोगों के बीच आर्कषण का केंद्र होती है। खासकर महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्तों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है।
प्रसिद्ध है भस्म आरती
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में कुल 6 बार आरती की जाती है, लेकिन भस्म आरती का खास महत्व होता है। इसमें शामिल होने के दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन महिलाओं को इस आरती से दूर रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महिलाओं को महाकाल की आरती नहीं देखनी चाहिए। इसके अलावा भी भस्म आरती से जुड़े कई नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है।
भस्म आरती में नियम
अगर आप भी महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने जा रहे हैं, तो कुछ नियम को जानना बेहद जरूरी है। बताते चलें कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती रोजना ब्रह्म मुहूर्त में होती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। यदि महिलाएं आरती में शामिल होती हैं, तो उन्हें घूंघट करना अनिवार्य है। यहां भस्म आरती के लिए ड्रेस कोड भी अनिवार्य है। महाकाल की आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों को धोती पनना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि धोती सिली हुई नहीं होनी चाहिए। आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की जाती है। आरती शुरू होने के बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया जाता है। इसके साथ ही मंदिर में मोबाइल फोन, कैमरे, चमड़े की चीजें ले जाने की अनुमति नहीं है।
महिलाओं को क्यों होती है मनाही
धार्मिक मान्यतानुसार, भस्म आरती से पहले रोजाना सुबह तड़के बाबा महाकाल का पूरे विधि-विधान से स्नान कराया जाता है। इस दौरान महाकाल के वस्त्र और आभूषण को उतार दिया जाता है। श्मशान से लाई भस्म को महाकाल का स्नान होता है। इस समय भगवान पूर्ण रूप से निवस्त्र होते हैं। ऐसे में महिलाओं को देखने की मनाही होती है। इसके अलावा श्मशान की भस्म में एक तरह की नकारात्मक ऊर्जा होती है, जिसका बुरा असर महिलाओं पर हो सकता है। इसलिए भी महिलाओं को भस्म आरती में शामिल होने की मनाही होती है।
शिव-बारात से जुड़ी है कथा
इतना ही नहीं पुराणों में इससे जुड़ी कई किवंदती भी हैं। मान्यता है कि जब भगवान शिव जी माता पार्वती के घर बारात लेकर पहुंचे, तो यहां उनके औघड़ और दिगंबर, भस्म रमे शरीर-स्वरूप को देखकर महिलाएं परेशान हो गईं। माता पार्वत की मां मैना और कई सारी महिलाएं शिव के इस रूप को देकर बेसुध होकर गिर गई थी। वह इससे बहुत घबरा गई थीं। इसलिए भी महिलाओं को भगवान शिव को इस रूप को देखना नहीं चाहिए।
महादेव भस्म क्यों करते हैं धारण
पौराणिक कथा के मुताबिक महादेव ने राक्षस दूषण का वध किया था और उसकी भस्म से अपना शृंगार किया था। तभी से श्मशान की भस्म से महाकाल की आरती करने की परंपरा चली आ रही है। इस आरती में शामिल होने वाले जातकों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। भूत-प्रेत बाधाए खत्म होती है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जाओं का भी नाश होता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
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