
महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, बन रहे हैं कई अद्भुत संयोग, पूजन के लिए ये मुहूर्त रहेंगे सबसे शुभ
Mahashivratri: हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह हुआ था।
Mahashivratri: हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। शास्त्रों में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन अगर सच्चे मन से पूजा, जप और व्रत किया जाए, तो भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि इस दिन की गई साधना से विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। साल का यह एक दिन ऐसा आता है जो पूरी तरह महादेव को समर्पित माना जाता है। इस दिन अगर भक्त व्रत रखकर चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा करते हैं, तो भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन देशभर के शिवालयों को सजाया जाता है और चार प्रहर में विधि-विधान से पूजा होती है। इस साल महाशिवरात्रि पर कई खास ग्रह-नक्षत्र के संयोग बन रहे हैं, जो इस दिन को और भी शुभ बना रहे हैं। आइए जानते हैं इस बार महाशिवरात्रि कब है, कौन-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं और पूजा का सबसे अच्छा समय क्या रहेगा…
इस साल कब है महाशिवरात्रि?
साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से कई जगहों पर शिवबारात भी निकाली जाती है और मंदिरों में खास सजावट देखने को मिलती है।
महाशिवरात्रि पर बन रहे हैं शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, इस बार महाशिवरात्रि पर एक खास और दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन त्रयोदशी के बाद चतुर्दशी तिथि का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस तरह का संयोग बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे संयोग में की गई पूजा जल्दी फल देती है और साधना का असर भी ज्यादा माना जाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग में करें पूजा
15 फरवरी को सुबह 7:45 बजे से शाम 7:00 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग पूजा-पाठ और शुभ कामों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। अगर आप महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करना चाहते हैं, तो सर्वार्थ सिद्धि योग में करना ज्यादा फलदायी माना जाता है।
श्रवण नक्षत्र और शिववास का संयोग
महाशिवरात्रि के दिन शिववास तो रहता ही है। इसके साथ ही इस बार शाम 7:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा। श्रवण नक्षत्र को भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। ऐसे में जो लोग शाम या रात के समय पूजा करेंगे, उन्हें इस नक्षत्र का भी लाभ मिल सकता है।
इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा षोडशोपचार विधि से करना शुभ माना जाता है। इस दिन चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है। सुबह से व्रत रखें और साफ मन से पूजा की तैयारी करें। चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करें। संध्या समय यानी प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक जरूर करें। जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि का महत्व
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन इस तरह पूजा करने से जीवन में चल रही परेशानियां कम होती हैं। दुख, कष्ट, रोग और आर्थिक दिक्कतों से राहत मिलने की आस्था मानी जाती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है।
चार प्रहर पूजा का आसान तरीका और समय-
महाशिवरात्रि की रात चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है। समय न मिले तो कम से कम एक बार मन से पूजा कर लें।
पहला प्रहर (06:39 PM – 09:45 PM): शाम ढलते ही पूजा शुरू करें। सबसे पहले झाड़-पूछ कर साफ जगह बनाएं, शिवलिंग पर गंगाजल और दूध चढ़ाएं। उसके बाद बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित करें। इस समय शांति से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ होता है।
दूसरा प्रहर (09:45 PM – 12:52 AM): इस समय दीप, अगरबत्ती और धूप से शिवजी का दीप पूजन करें। चंदन लगाकर शिवलिंग के चारों ओर ध्यान से चक्कर लगाएं। इस बीच भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए फल और मिठाई/मोदक भी अर्पित करें।
निशीथ काल (12:28 AM – 01:17 AM): यह समय सबसे शुभ और खास माना जाता है। इसी समय भजन-कीर्तन, शिव स्तुति या लंबा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जाप करें। अगर सभी प्रहर करने का मन है तो यही रात का मुख्य पूजा समय है।
तीसरा प्रहर (12:52 AM – 03:59 AM): इस प्रहर में शिवजी के ध्यान (ध्यान मुद्रा में) बैठें, मन को शांत रखें और मनोकामनाओं को ध्यान में लाकर भक्ति करें।
चतुर्थ प्रहर (03:59 AM – 07:06 AM): सुबह होते ही अंतिम चरण में शिवजी के लिए दीप जलाएं, आरती करें और ब्रह्म मुहूर्त के समय अपने प्रियजनों के साथ पूजा का समापन करें। सुबह के ताजे वातावरण में शिवजी को प्रसाद और जल अर्पित करें।

लेखक के बारे में
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