Maha Shiv Puran: वरदान मिलते ही भस्मासुर ने महादेव को ही करना चाहा भस्म, फिर विष्णु जी ने लिया मोहिनी अवतार

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Maha Shivpuran Bhasmasura Katha: महाशिवपुराण में भस्मासुर को मिले वरदान और भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी एक प्रचलित कथा है। इस कथा को यहां पढ़ें। 

Maha Shiv Puran: वरदान मिलते ही भस्मासुर ने महादेव को ही करना चाहा भस्म, फिर विष्णु जी ने लिया मोहिनी अवतार

हिंदू धर्म में महाशिवपुराण को प्रमुख पुराणों में से एक माना जाता है। इसमें भगवान शिव के से जुड़ी कई ऐसी कथाएं हैं जिनके बारे में आज भी लोग बड़े विश्वास के साथ पढ़ते और सुनते हैं। इन्हीं में से एक कथा भस्मासुर से जुड़ी हुई है। पुराण के अनुसार भस्मासुर नाम के असुर ने कठोर तपस्या करके महादेव को प्रसन्न किया था और उनसे एक अनोखा वरदान पा लिया था। हालांकि महादेव से वरदान मिलते ही उसके इरादे बदल गए और उसने भगवान शिव को ही भस्म करने की कोशिश की। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर भगवान शिव को इस संकत से बचाया था। जानिए इस कथा को।

भस्मासुर को ऐसे मिला वरदान

महाशिवपुराण के अनुसार भस्मासुर भगवान शिव का भक्त था। सालों तक उसने कठिन तपस्या की। उसकी तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसके सामने प्रकट होकर मनचाहा वरदान मांगने को कहा। इसके बाद भस्मासुर ने वरदान मांगा कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रखे वो तुरंत भस्म हो जाए। भगवान शिव ने ये वरदान दे भी दिया। वरदान पाते ही भस्मासुर घमंड में आ गया। उसे अपनी ताकत पर इतना भरोसा हो गया कि वो अपने वरदान को भगवान शिव पर ही आजमाने की सोचने लगा।

भस्मासुर ने किया शिवजी का पीछा

कथा के अनुसार भस्मासुर ने भगवान शिव को भस्म करना चाहा और उनके पीछे ही दौड़ पड़ा। भगवान शिव वहां से निकल गए और इस दौरान सभी देवताओं के बीच चिंता का माहौल बना। इसके बाद भगवान शिव विष्णु जी के बाद पहुंचकर सारी बात बताते हैं। फिर विष्णु जी लोगों को बचाने के लिए मोहिनी अवतार धारण करते हैं।

भस्मासुर का हुआ अंत

भगवान विष्णु का मोहिनी अवतार इतना सुंदर था कि भस्मासुर सब कुछ भूलकर उन्हें देखकर मोहित हो जाता है। मोहिनी अवतार की खूबसूरती देखकर भस्मासुर वही रुक जाता है और शादी का प्रस्वात भी सामने रख देता है। तब मोहिनी भस्मासुर से बस इतना ही कहती है कि वो सिर्फ उससे शादी करेगी जो उसकी तरह ही नृत्य करने में निपुण हो। भस्मासुर उससे नृत्य सीखने की मदद मांगता है और फिर मोहिनी के हर कदम की नकल करने लगा।

नृत्य के दौरान ही मोहिनी अपना हाथ खुद के सिर पर रख दिया। भस्मासुर भी बिना सोचे-समझे ही ये काम किया और तुरंत भस्म हो गया। इस तरह से भगवान विष्णु की मदद से एक बड़ा संकट टला। मान्यता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव जिस गुफा में छिपे थे वो जगह अब गुप्तधाम के नाम से जानी जाती है।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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