Maha shivratri 2026 Puja Vidhi: आज महाशिवरात्रि की पूजा में अब कौन सा फूल चढ़ाएं?
Maha shivratri 2026: भगवान शिव को कुछ फूल काफी प्रिय है। मान्यता है कि भगवान शिव को कुछ विशेष तरह के फूल चढ़ाने से भक्तों की मनोकानाएं पूरी होती है। आज हम आपको बताएंगे कि अब महाशिवरात्रि की पूजा में कौन सा फूल चढ़ाएं और इन्हें चढ़ाने से क्या लाभ मिलेंगे।

महाशिवरात्रि का पर्व आज यानी 15 फरवरी को पूरे देशभर में बड़े ही उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देशभर के शिवालय भक्तों से भरे पड़े हैं। पूरे दिन शिव भक्त मंदिर में जाकर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से भोलेबाबा प्रसन्न होते हैं। इस पावन अवसर पर पूरी रात भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव को भक्त अलग-अलग चीजें अर्पित करते हैं। भगवान शिव को कुछ फूल काफी प्रिय है। मान्यता है कि भगवान शिव को कुछ विशेष तरह के फूल चढ़ाने से भक्तों की मनोकानाएं पूरी होती है। आज हम आपको बताएंगे कि अब महाशिवरात्रि की पूजा में कौन सा फूल चढ़ाएं और इन्हें चढ़ाने से क्या लाभ मिलेंगे।
जूही के फूल
महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को जूही के फूल अर्पित करना बेहद शुभ लाभकारी होता है। मान्यता है कि इसे अर्पित करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती है।
कनेर के फूल
भगवान शिव की पूजा में कनेर के फूल अर्पित करना भी शुभ फलदायी होता है। मान्यता है कि इस फूल को चढ़ाने से साधक को वस्त्र-सम्पदा की प्राप्ति होती है।
शेफालिका के फूल अर्पित करें
भगवान शिव की पूजा में सेंदुआरि या शेफालिका के फूल अर्पित करने से मन पवित्र और निर्मल होता है। इससे भगवान शिव की कृपा भक्तों पर बनी रहती है। साथ ही रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। साथ ही साधक की मनोकामनाएं पूरी होती है।
एक लाख बिल्व पत्र करें अर्पित
महाशिवरात्रि की पूजा में बिल्व पत्र अर्पित करना बेहद शुभ होता है। मान्यता है कि भगवान को यह अत्यंत प्रिय है। अगर आप मनचाहा फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो एक लाख बिल्व पत्रों से भगवान शिव का पूजन करें। इससे हर कार्य पूरे होते हैं। साथ ही आर्थिक उन्नति होती है। मन भी शांत होता है।
दुर्वा अर्पित करें
भगवान शिव को दुर्वा भी चढ़ान काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दीर्घायु की इच्छा रखने वाले साधक महाशिवरात्रि की पूजा में 1 लाख दुवाओं का इस्तेमाल करें या इससे शिव की पूजा करें। मान्यता है कि इससे शिव जी की कृपा प्राप्त होती है।
अगस्त्य के फूल
महाशिवरात्रि की पूजा अगर अगस्त्य के फूलों से की जाए, तो इससे साधक को महान यश की प्राप्ति होती है।
अडहुल के फूल
अडहुल के फूल से महाशिवरात्रि की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है।
करवीर के फूल
महाशिवरात्रि की पूजन में अगर एक लाख करवीर के फूलों का इस्तेमाल किया जाए, तो इससे बड़े से बड़े रोगों का नाश होता है।
गुल दुपहरिया के फूल
बन्धूक यानी गुल दुपहरिया के फूलों से महाशिवरात्रि की पूजा की जाए, तो इससे आभूषण की प्राप्ति होती है।
चमेली और अलसी के फूल
इसके अलावा चमेली से शिव को पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। वहीं अलसी के फूलों से महादेव जी का पूजन करने वाला पुरुष भगवान विष्णु का प्रिय हो जाता है।
शमी पत्र और बेल के फूल
महाशिवरात्रि की पूजा में यदि शमी पत्रों को अर्पित करते हैं, तो साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही बेला के फूल चढ़ाने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही इससे शिव जी शुभ लक्षणा पत्नी प्रदान करते हैं।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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