महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल में मिलाकर चढ़ाएं ये शुभ चीजें, कष्टों से मिलेगी मुक्ति
महाशिवरात्रि पर शिव जी पर मात्र एक लोटा जल चढ़ाने पर ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। भक्तों की अधूरी इच्छाएं पूरी करते हैं। इस दिन आप सबसे पहले जल से अभिषेक करें। इससे ना सिर्फ साधक के पापों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के अच्छे दिन शुरू हो जाते हैं। जीवन में उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं।

शिवभक्तों को महाशिवरात्रि पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। इस साल यह पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन महादेव पहली बार शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। साथ ही यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन का भी प्रतीक है। इस पर्व पर शिवलिंग के अभिषेक का विशेष महत्व होता है। लोग अलग-अलग चीजों से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इससे ना सिर्फ साधक के पापों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के अच्छे दिन शुरू हो जाते हैं। जीवन में उन्नति के रास्ते खुल जाते हैं।
गंगाजल से अभिषेक
महाशिवरात्रि परशिव जी पर मात्र एक लोटा जल चढ़ाने पर ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। भक्तों की अधूरी इच्छाएं पूरी करते हैं। इस दिन आप सबसे पहले जल से अभिषेक करें। इसके अलावा गंगाजल से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। अगर आप जल में गंगाजल की दो बूंदे भी डालकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, तो इससे आप सारे कष्टों से मुक्ति पा लेंगे। शिवपुराण के मुताबिक, शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से मोक्ष व भोग की प्राप्ति होती है।
दूध से अभिषेक
महाशिवरात्रि पर शुद्ध गाय के दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है। दूध शांति और पवित्रता का प्रतीक है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से शरीर और मन को शांति मिलती है। साथ ही मानसिक शांति मिलती है। शिवलिंग पर चांदी के बर्तन से जल दूध चढ़ा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि चांदी एक पवित्र और शुद्ध धातु है और इसे चंद्रमा की धातु भी माना जाता है और यदि आप इस धातु के बर्तन से शिवलिंग पर दूध चढाते हैं तो विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
दही और घी से अभिषेक
दही से भी शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। दही गाय के दूध का बना होना चाहिए। इसे अर्पित करने पर आर्थिक तंगी समाप्त होती है। भगवान शिव के मंत्रों का जाप करते हुए शिवलिंग पर घी की धारा चढ़ाना चाहिए। इससे वंश का विस्तार होता है। रोगों से मुक्ति मिलती है और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
जल में चंदन मिलाकर करें अभिषेक
शिवलिंग का अभिषेक आप जल में चंदन मिलाकर भी कर सकते हैं। यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है। चंदन को ठंडक और सुंगधता का प्रतीक माना जाता है। इसे महाशिवरात्रि पर अर्पित करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। जल में आप काले तिल को मिलाकर भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। इससे अभिषेक करने से भोलेनाथ आपको बुरी नजर से बचाकर रखते हैं। कहा जाता है इससे तंत्र बाधा दूर होती है।
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लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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