आज 9 घंटे से ज्यादा देर तक माघ पूर्णिमा पर भद्रा की छाया, जानें पूर्णिमा पूजा के शुभ मुहूर्त
Magh Purnima Time Pooja Muhurat Magh Purnima 2026: रविवार को 1 फरवरी के दिन माघी पूर्णिमा स्नान, व्रत और दान किया जाएगा। इस बार माघ पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग में पड़ रही है।

Magh Purnima Time Pooja Muhurat: इस साल की माघ पूर्णिमा का व्रत रविवार एक फरवरी को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन माघी पूर्णिमा स्नान, व्रत और दान किया जाएगा। इस बार माघ पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग में पड़ रही है। इस योग में दान, यज्ञ, स्नान, और व्रत रखने से मन मांगी मुराद की प्राप्ति होती है। 1 फरवरी को सुबह 05:52 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होगी और 2 फरवरी को 03:38 ए एम तक तिथि समाप्त होगी। माघ पूर्णिमा के दिन व्रत, उपवास और दान से ज्यादा स्नान का महत्व है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इस साल की माघी पूर्णिमा पर भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और भद्रा की टाइमिंग-
आज 9 घंटे से ज्यादा देर तक माघ पूर्णिमा पर भद्रा की छाया, जानें पूर्णिमा पूजा के शुभ मुहूर्त
माघी पूर्णिमा पर भद्रा
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर सुबह 07:09 बजे से 04:42 बजे तक भद्रा रहेगी। इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहने वाले हैं। जब भी चंद्र कर्क राशि में रहते हैं तब पृथ्वी लोक पर भद्रा मान्य रहती है।
माघ पूर्णिमा पर पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त 05:24 ए एम से 06:17 ए एम
- अभिजित मुहूर्त 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
- विजय मुहूर्त 02:23 पी एम से 03:07 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 05:58 पी एम से 06:24 पी एम
- अमृत काल 05:59 पी एम से 07:29 पी एम
- निशिता मुहूर्त 12:08 ए एम, फरवरी 02 से 01:01 ए एम, फरवरी 02
- रवि पुष्य योग 07:09 ए एम से 11:58 पी एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग 07:09 ए एम से 11:58 पी एम
माघी पूर्णिमा की पूजा विधि
माघी पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करनी चाहिए। इस दिन विष्णु भगवान को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए और लक्ष्मी माता को गुलाबी या लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए। वहीं, माघी पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ना पुण्यदायक माना जाता है। माघी पूर्णिमा तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, अगर आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान करें। माघी पूर्णिमा का व्रत रखने और इस दिन लक्ष्मी नारायण की विधिवत पूजा करने से घर में सुख-संपत्ति और खुशहाली बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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