
Lakshmi upaay: ऐसे काम करेंगे, तो लक्ष्मी विहीन रहेंगे, ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताए गए हैं ये काम
Brahmvaivart puran: मां लक्ष्मी को कौन नहीं पाना चाहता है। हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते हैं। लेकिन पुराणों में मां लक्ष्मी को लेकर कई बातें बताई गई हैं। बह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कहा गया है कि जहां शंख ध्वनि नहीं होती,
मां लक्ष्मी को कौन नहीं पाना चाहता है। हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते हैं। लेकिन पुराणों में मां लक्ष्मी को लेकर कई बातें बताई गई हैं। बह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कहा गया है कि जहां शंख ध्वनि नहीं होती, तुलसीका निवास नहीं रहता, शंकरकी पूजा नहीं होती तथा ब्राह्मणोंको भोजन नहीं कराया जाता, वहां लक्ष्मी नहीं रहतीं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि जिस जगह पर मेरे भक्तों की निंदा होती है, वहां रहने वाली महालक्ष्मी के मन में क्रोध आता है, इसलिए वे उस स्थानकों छोड़कर चल देती हैं। यह भी कहा गया है कि जिस घर में भगवान श्रीहरि का एकादशी के दिन पूजन होता है। इसके अलावा जहां जम्माष्टमी के दिन अन्न खाता है, उसके घर से भी लक्ष्मी चली जाती हैं। जो मेरे नाम का तथा अपनी कन्या का विक्रय करता है एवं जहां अतिथि भोजन नहीं पाता है, उस घरको त्यागकर प्रिया लक्ष्मी चली जाती हैं।
इसके अलावा यह बी कहा गया है कि जो अशुद्ध हदय, क्रूर, हिंसक और निन्दक है, उस ब्राह्णण के हाथ का जल पीने में भगवती लक्ष्मी डरती हैं, इसलिए अत: उसके घरसे वे चल देती हैं।
जो शूद्रों से यज्ञ कराता है, कायर का अन्न खाता है, नाखूनों से पृथ्वी को कुरेदता रहता है; जो निराशावादी है, सूर्योदय के समय भोजन करता है, दिन में सोता और जो सदाचारहीन है, ऐसे घर से प्रिया लक्ष्मी चली जाती हैं। जो व्यक्ति भीगे पैर अथवा नंगा होकर सोता है और निरन्तर बेसिर-पैर की बातें करता है, उसके घर से साध्वी लक्ष्मी चली जाती हैं। जो सिर पर तैल लगाकर उसी से दूसरे के अंग को स्पर्श करता है अर्थात् अपने सि रका तैल दूसरे को लगाता है तथा अपनी गोद में बाजा लेकर उसे बजाता है, उसके घर से रुष्ट होकर लक्ष्मी चली जाती हैं। जो विष्णुभक्तिसे हीन है, उस अपवित्र पुरुष के घर से मेरी प्रिया लक्ष्मी चली जाती हैं। जो ब्राह्मणोंकी निंदा करता है, जीवों की सदा हिंसा करता है और दयारहित है, उसके घर से लक्ष्मी चली जाती हैं।
जिस स्थानपर भगवान् श्रीहरिकी चर्चा होती है और उनके गुणों का गान होता है, वहीं पर भगवती लक्ष्मी निवास करती हैं| पितामह ! जहां भगवान् श्रीकृष्णका और उनके भक्तों का यश गाया जाता है, वहीं उनकी प्राणप्रिया भगवती लक्ष्मी सदा विराजती हैं। जहां शंख ध्वनि होती है और शालिग्राम, तुलसी-इनका निवास रहता है एवं उनकी सेवा, वन्दना और ध्यान होता है, वहां लक्ष्मी सदा विद्यमान रहती हैं। जहां शिवलिंग की पूजा और पवित्र कीर्तन तथा दुर्गापजन एवं कीर्तन होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





