श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर 27 फरवरी को मनाई जाएगी लठामार होली

Feb 25, 2026 06:57 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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लठमार होली पर जन्मभूमि के तीनों द्वार से प्रवेश एवं निकास रहेगा, साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि कोई भी इलैक्ट्रोनिक सामान एवं प्रतिबंधित सामान साथ लेकर न आयें, जिससे उनका प्रवेश शीघ्रतापूर्वक हो सके।

श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर 27 फरवरी को मनाई जाएगी लठामार होली

श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित केशव वाटिका में लठामार होली महोत्सव का आयोजन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ 27 फरवरी रंगभरनी एकादशी को किया जाएगा। जन्मस्थान सेवा संस्थान ने लठामार होली के आयोजन को भव्य एवं मर्यादाओं के अनुसार संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियों पूर्ण कर ली हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुऐ श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि लठ्ठमार होली 27 फरवरी को सांय 4 बजे से प्रारम्भ होगी। ब्रज के प्रसिद्ध फाग गायक एवं होली के नृत्य आदि की परंपरागत कलाकार श्रीकृष्ण जन्मस्थान की होली में अपनी सहभागिता देंगे। ब्रज के विभिन्न अंचलों के होली के परंपरागत कार्यक्रमों का श्रीकृष्ण-जन्मस्थान की लठामार होली में श्रद्धालु दर्शन कर पायेंगे। होली फाग रसिया, लोकगीत एवं नृत्य का सुन्दर दर्शन श्रीकृष्ण-जन्मस्थान की लठामार होली में होगा।

कैसे मनाया जाएगा महोत्सव
उन्होंने बताया कि इस लठामार होली में राधारानी के जन्म-ग्राम रावल के हुरियारे-हुरियारिनों के साथ-साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े रसिक भक्तजन भी लठमार होली में सम्मिलित होकर भक्तों को दिव्य आनन्द की अनुभूति करायेंगे। केशव वाटिका में पुष्प होली के साथ-साथ दिव्य गुलाल की वर्षा की जायेगी जिसमें ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि पर लठामार होली का आनन्द श्रद्धालुजन लेंगे।

संस्थान प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि टेसू के फूलों से निर्मित प्राकृतिक रंग भक्तों को प्रिया-प्रियतम को रंग से सराबोर कर होली के आनन्द में विशिष्ट रस प्राप्त करायेंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर की मर्यादा के विपरीत आचरण जैसे जूते-चप्पल उछालना आदि कृत्य करने वाले तत्वों से पुलिस एवं प्रशासन के सहयोग से कड़ाई से निपटा जायेगा। संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को देखते हुऐ सामान घरों पर कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है।

इलैक्ट्रोनिक सामान पर प्रतिबंध रहेगा
इस अवसर पर जन्मभूमि के तीनों द्वार से प्रवेश एवं निकास रहेगा, साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि कोई भी इलैक्ट्रोनिक सामान एवं प्रतिबंधित सामान साथ लेकर न आयें, जिससे उनका प्रवेश शीघ्रतापूर्वक हो सके। किशोर भरतिया एवं अनिलभाई ने बताया कि प्रिया-प्रियतम ने इस पवित्र लीला का दर्शन कराकर ब्रजवासियों को परमानन्द प्राप्त कराया था।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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