Lathmar Holi 2026: 25 या 26 फरवरी जानें बरसाना और नंदगांव में कब खेली जाएगी लट्ठमार होली? जान लें सही तारीख

Feb 21, 2026 11:02 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Lathmar Holi in Barsana and Nandgaon: ब्रज की होली का महत्व पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली लोगों के बीच प्रसिद्ध है। हालांकि रंगों का उत्सव यहां पर कई दिन पहले से ही शुरु हो जाता है।

Lathmar Holi 2026: 25 या 26 फरवरी जानें बरसाना और नंदगांव में कब खेली जाएगी लट्ठमार होली? जान लें सही तारीख

Lathmar Holi 2026: महाशिवरात्रि के बाद अब हर कोई होली के लिए उत्साहित हैं। कई लोग होली की तैयारियां भी शुरू कर चुके हैं। बता दें कि हिंदू धर्म में इस त्योहार का खास महत्व होता है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को ही होली मनाई जाती है। पूरे देश भर में होली का उत्साह देखते ही बनता है लेकिन ब्रज क्षेत्र में इसकी रौनक ही अलग होती है। बसंत पंचमी से ही यहां पर होली की शुरुआत हो जाती है और इस पर्व को लगभग 40 दिन तक मनाते हैं। यहां पर अलग-अलग तरीके से होली खेली जाती है लेकिन ब्रज की लट्ठमार होली का कोई भी मुकाबला नहीं होता है। यहां के बरसाना और नंदगांव में सुप्रसिद्ध लट्ठमार होली खेलने की प्रथा है। इस महापर्व में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। नीचे विस्तार से जानें कि 2026 में यहां पर लट्ठमार होली कब-कब खेली जाएगी?

इस दिन खेली जाएगी लट्ठमार होली

ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव काफी पहले से शुरु हो जाता है। हालांकि माहौल रंगभरी एकादशी से ही देखने को मिलता है। बरसाना और नंदगांव में लड्डू और फूलों वाली होली समेत लट्ठमार होली जैसी कई परंपराएं निभाई जाती हैं। हिंदू पंचांग के हिसाब से फाल्गुन मास में पड़ने वाले शुक्ल पक्ष की नवमी वाले दिन ही लट्ठमार होली खेली जाती है। इस बार नवमी तिथि की शुरुआत 25 फरवरी के सूर्योदय के साथ ही शुरु हो जाएगी। ये तिथि अगले दिन यानी 26 फरवरी की सुबह 2 बजकक 40 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में पंचांग को ध्यान में रखते हुए बरसाना में ये होली 25 को ही खेली जा रही है। वहीं नंदगांव में लट्ठमार इसके अगले दिन यानी 26 फरवरी को खेली जाएगी।

लट्ठमार होली की खास बात

ब्रज क्षेत्र में लट्ठमार होली बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व का सीधा-सीधा संबंध भगवान कृष्ण और राधा के साथ जुड़ा है। इस होली में बरसाना और नंदगांव के लोग हिस्सा बनते हैं। महिलाएं इस दौरान घूंघट ओढ़कर पुरुषों पर लट्ठ बरसाती हैं। हालांकि ये प्रतीकात्मक ही होता है लेकिन इस दौरान का उल्लाह और उत्साह देखते ही बनता है। इस दौरान भजन और मंत्रों की गूंज इस परंपरा को और भी दिव्य बना देते हैं। इस पर्व को मनाकर लोग सिर्फ मस्ती ही नहीं करते हैं बल्कि इसके जरिए भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रति अपने प्रेम और आस्था को भी दिखाते हैं।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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