क्या ग्रहों की दशा से कर्मफल मिलता है? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि जब किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ अनिष्ट हो जाता है, तो लोग ग्रहों को दोष देते हैं। क्या ग्रहों की दशा कर्मों के फल को प्रभावित करती हैं। या हमारे कर्म ग्रहों की दशा से बचा सकते हैं। चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया।

क्या ग्रहों की दशा से कर्मफल मिलता है? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

प्रेमानंद महाराज के सामने भक्त कुछ ना कुछ जिज्ञासा लेकर आते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि जब किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ अनिष्ट हो जाता है, तो लोग ग्रहों को दोष देते हैं। क्या ग्रहों की दशा कर्मों के फल को प्रभावित करती हैं। या हमारे कर्म ग्रहों की दशा से बचा सकते हैं। चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया।

ग्रह-नक्षत्र का प्रभाव

महाराज जी कहते हैं कि दोनों बातें हैं। हमारे बुरे जब कर्म आने होते हैं, जो नक्षत्र हैं, वो उस बुरी दशा को ग्रहण करके हमारे ऊपर छोड़ते हैं। हमारे कर्म के अनुसार और अगर हमारा कर्म सही है, तो नक्षत्र भी हमारे सही हो जाएंगे। वो कर्म की परंपरा से चलते हैं। जैसे जब हमको बुरा समय व्यतीत करना है और बड़ा कष्ट भोगना है, तो नक्षत्र बुरी दशा में बैठ जाएंगे। क्योंकि कर्म के अनुसार भोग भोगना है।

साढे साती का प्रभाव कैसे कम करें

महाराज जी कहते हैं कि अगर हमारा सही समय आ गया है, तो नक्षत्र अच्छी दिशा में बैठ जाएंगे। महाराज जी आगे कहते हैं कि एक दशा हम आपको बता देते हैं, अगर भगवान के शरण में हो, तो साढ़े साती शनिचर रोज लगा रहे, तो कुछ नहीं उखाड़ पाएगा। भगवान की शरण में यदि भजन करते हो, तो यह ग्रह नक्षत्र कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। महाराज जी ने बताया कैसे ग्रह-नक्षत्रों की दशा से बच सकते हैं, तो नाम जप करो, इधर-उधर मन को ना भटकाएं।

महाराजी कहते हैं कि एक बार एक आदमी हित धाम में मिला, तो वो कई लोहे के छल्ले पहने हुए थे। हमने उससे कहा कि ये क्या है, तो उसने कहा कि घोड़े की नाल के हैं, हमने कहा कि इनसे क्या होता है, तो बोला कि शनिचर का प्रभाव नहीं चढ़ेगा, हमारे ऊपर। महाराज जी कहते हैं कि अरे वो घोड़ा तो बच नहीं पा रहा है, कुंतलो मनो लदकर रोड़ पर दौड़ रहा है और उसकी नाल तुम पहन लोगे, तो वो नाल तुम्हें कर्म बंधन से बचा लेगी? अरे राधा-राधा रटो।

अच्छे आचरण करो

महाराज जी कहते हैं कि भगवान के शरण में होकर अच्छे आचरण करो, जो ग्रह-नक्षत्र खराब हैं, सब अनुकूल हो जाएंगे। ये बुरी दशा में होने पर भी ये आपका मंगल करेंगे। जहां राधा वहां कोई बाधा नहीं। महाराज जी कहते हैं कि जिसको साढ़े साती चढ़ा हो, बस वो राधा-राधा रटना शुरू कर दें। अगर कुछ बिगड़ जाए तो हमें बता देना। महाराज जी कहते हैं कि ऐसे चाहे कुंतलों तेल चढ़ा दो, शनि भगवान बिल्कुल प्रसन्न नहीं होंगे। ये सब नक्षत्र देवता हैं, ये सब भगवान के पार्षद हैं, जब आप भगवान के सम्मुख हो जाओगे, तो ये सब कृपा करने लेगेंगे।

महाराज जी अंत में कहते हैं कि जब आप भगवान से विमुख आचरण करोगे, तो यही आपका विरोध करने लगेंगे। अशांति पैदा कर देंगे, विपत्ति पैदा कर देंगे। वैसे सिद्धांतिक ये है कि जब हमारा बुरी दशा आने को होती है, तो हमारे जो ग्रह नक्षत्र हैं, वो बुरी दशा में बैठ जाते हैं और हमें दंड देने लगते हैं। जब हमारी अच्छी दशा आनी होती है, तो ये अच्छी दशा में बैठ जाते हैं। लेकिन भगवान की शरणागति में ये अगर बुरी दशा में भी बैठे हो, तो भी हमारा मंगल होगा, अमंगल नहीं होगा।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
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