DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   धर्म  ›  जानिए कौन से ग्रह हैं संतान सुख के लिए जिम्‍मेदार

कुंडलीजानिए कौन से ग्रह हैं संतान सुख के लिए जिम्‍मेदार

पंचांग पुराण टीम,मेरठPublished By: Praveen
Sun, 07 Jun 2020 05:46 PM
जानिए कौन से ग्रह हैं संतान सुख के लिए जिम्‍मेदार

संतान प्राप्ति या संतान सुख मनुष्य जीवन की महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रत्येक दम्पत्ति को संतान प्राप्ति एवं माता-पिता कहलाने के सौभाग्य की इच्छा होती है। संतान प्राप्‍ति के बाद व्यक्ति का जीवन नये रंगों से भर जाता है, लेकिन अनेक दंपत्ति ऐसे भी हैं जिन्‍हें संतान सुख नहीं मिल पाता। अनेक को बाधाओं या विलंब से संतान प्राप्ति हो पाती है। संतान प्राप्‍ति में हमारी जन्मकुंडली में बनी ग्रहस्थिति बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जानिए कौन से ग्रह संताप प्राप्‍ति में सहायक सिद्ध होते हैं।
कुंडली में पंचम भाव संतान सुख का स्थान है। बृहस्पति संतान का नैसर्गिक कारक है। ऐसे में पंचम भाव और बृहस्पति पर ही संतान प्राप्‍ति के लिए विचार किया जाता है। हालांकि इसमें पंचम से पंचम अर्थात नवम भाव की भी सहायक भूमिका होती है। स्त्री की कुंडली में नवम भाव को भी संतान पक्ष के लिए खास माना गया है। कुंडली में विशेषकर पंचम भाव, पंचम भाव का स्वामी ग्रह और बृहस्पति किस स्थिति में हैं यह हमारे जीवन में संतान प्राप्ति या संतान सुख को निश्चित करता है। यदि कुंडली में पंचम भाव और बृहस्पति अच्छी स्थिति में
हो तो सुगमता से संतान प्राप्ति होती है, परंतु जब पंचम भाव और बृहस्पति पीड़ित या कमजोर हों तो संतान प्राप्ति में बाधाएं और विलम्ब होता है।
 
संतान सुख के योग-
-यदि पंचमेश पंचम भाव में ही स्थित हो या पंचमेश की पंचम भाव पर दृष्टि हो तो संतान पक्ष अच्छा होगा।
-यदि पंचमेश स्व या उच्च राशि में हो तो यह भी अच्छे संतान सुख का योग है।
-पंचमेश का कुंडली के शुभ स्थान अर्थात केंद्र और त्रिकोण (1,4,7,10,5,9) में होना भी संतान पक्ष के लिए शुभ है।
-पंचम भाव का शुभ ग्रहों के प्रभाव में होना भी अच्छे संतान सुख में सहायक होता है।
-यदि बृहस्पति स्व या उच्च राशि (धनु, मीन, कर्क) में होकर शुभ स्थान में हो तो अच्छा संतान सुख देता है।
-बृहस्पति का केंद्र और त्रिकोण (1,4,7,10,5,9) में बलि होकर बैठना भी अच्छा संतान सुख देता है।
-पंचम भाव पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ना भी अच्छे संतान सुख में सहायक होता है।
-पंचमेश का लग्नेश और नवमेश के साथ राशि परिवर्तन करना भी अच्छा संतान सुख देता है।
 
संतान पक्ष में बाधा के योग -
-यदि पंचमेश पाप भाव (6,8,12) में हो तो संतान प्राप्ति में बाधा या विलम्ब होता है।
-छटे, आठवें और बारहवे भाव के स्वामी का पंचम भाव में बैठना संतान प्राप्ति को बाधित करता है।
-यदि पंचमेश नीच राशि में हो तो यह भी संतान सुख में बाधा डालता है।
-बृहस्पति यदि पाप भाव (6,8,12) में हो तो संतान पक्ष से जुडी समस्याएं उपस्थित होती हैं।
-बृहस्पति है नीच राशि (मकर) में होना भी संतान सुख में कमी करता है।
-बृहस्पति जब राहु के साथ होने से पीड़ित हो तो भी संतान सुख में बाधा या विलम्ब होता है।
-पंचम भाव में पाप ग्रहों का शत्रु राशि में बैठना या पंचम भाव में कोई पाप योग बनना भी संतान प्राप्ति में बाधक बनता है।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
 

संबंधित खबरें