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कुंडली

जानिए, वे ग्रह जो बीमारी के लिए जिम्‍मेदार हैं...

पंचांग पुराण टीम,मेरठPublished By: Praveen
Sun, 07 Jun 2020 05:33 PM
जानिए, वे ग्रह जो बीमारी के लिए जिम्‍मेदार हैं...

स्वस्थ शरीर ही जीवन निर्वाह के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण जरुरत है। स्वस्थ शरीर से ही व्यक्ति जीवन में अपनी जिम्‍मेदारियों का पालन और सुखों का उपभोग कर पाता है। स्वास्थ खराब होने पर अनेक संघर्ष और रुकावटों से जीवन रूक जाता है।
ज्‍योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार हमारी जन्मकुंडली के 12 भावों में से पहला भाव अर्थात लग्न भाव हमारे स्वास्थ और शरीर का प्रतिनिधित्व करता है। अर्थात कुंडली में लग्न भाव और लग्नेश की स्थिति व्यक्ति के स्वास्थ्‍य को निश्चित करती है। कुंडली का छटा भाव रोग या बीमारी का भाव माना गया है और आठवां भाव मृत्यु और गम्भीर कष्टों का। ऐसे में व्यक्ति के स्वास्थ्‍य की स्थिति के आंकलन के लिए लग्न, लग्नेश, छठे और आठवें भाव का विश्लेषण जरुरी होता है। जिन लोगों की कुंडली में लग्न और लग्नेश पीड़ित या कमजोर स्थिति में होते हैं उनके स्वास्थ्‍य में अधिकतर उतार-चढ़ाव रहते हैं। ऐसे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। विभोर इंदुसुत के अनुसार कुंडली में लग्न और लग्नेश कमजोर या पीड़ित होने पर व्यक्ति जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाता है। अगर कुंडली में चन्द्रमा छटे या आठवें भाव में हो तो ये इम्यून पावर को भी कम करता है और रोगों को बढ़ता है। यदि कुंडली के छटे और आठवें भाव में कोई पाप योग बन रहा हो तो भी व्यक्ति को स्वास्थ्‍य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जानिए कब-कब स्‍वास्‍थ्‍य में परेशानी आती रहती हैं।

- यदि कुंडली में लग्नेश पाप भाव विशेषकर छटे या आठवे भाव में हो तो व्यक्ति के शरीर की इम्युनिटी कमजोर होती है। वह स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर हमेशा परेशन रहता है।
-लग्नेश यदि अपनी नीच राशि में हो तो भी व्यक्ति का स्वास्थ्‍य पक्ष कमजोर होता है।
-कुंडली में लग्नेश का षष्टेश या अष्टमेश के साथ योग भी स्वास्थ्‍य की परेशानियां पैदा करता है।
-यदि षष्टेश या अष्टमेश लग्न में हो तो भी व्यक्ति का स्वास्थ्‍य की समस्‍याएं बनी रहती हैं।
-चन्द्रमां का कुंडली के छटे और आठवे भाव में बैठना इम्युनिटी को कमजोर करता है। ऐसे व्यक्ति जल्दी बीमारियों का शिकार हो जाता है।
-राहु का आठवें भाव में बैठना स्वास्थ्‍य में अस्थिरता देता है। राहु अष्टम होने से व्यक्ति को जल्दी इंफेक्शन होने की समस्या होती है और जल्दी जल्दी बीमार होने की स्थिति बनी रहती है।
-यदि लग्न में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो या लग्न में कोई पाप योग बन रहा हो तो भी व्यक्ति का स्वास्थ्‍य कमजोर रहता है।
-कुंडली के आठवें और छटे भाव में अधिक ग्रहों का होना भी स्वास्थ के लिए अच्छा नहीं होता।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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