कृत्तिका नक्षत्र को पवित्र मानते हैं ईरानी, जानें भारतीय ज्योतिष में क्या है इसकी कहानी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जिन तारों से ज्ञान तोड़ लाने की बात की, वह कृतिका नक्षत्र है, जिसे उन्होंने अंग्रेजी में प्लीएडीज लिखा। क्या हैं ग्रीक, फारसी और भारतीय परंपराओं में इसकी कहानियां? ज्योतिष में इसका महत्व और मॉडर्न एस्ट्रोनॉमी से जुड़ी इस पर नई जानकारियां

अमेरिका-इजरायल की बमबारी में ईरान के बड़े शिक्षा संस्थान भी निशाना बने। जब वहां के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर अमेरिका ने फाइटर जेट से बमबारी की, तो हमले की निंदा करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर कमेंट किया कि हमलावरों अमेरिका और इजरायल ने ईरान के MIT पर बम बरसाए। अरागची ने शरीफ यूनिवर्सिटी को MIT क्यों लिखा था? पूरी दुनिया में जितना मशहूर अमेरिका का मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी है, अरब देशों और ईरान में वही दर्जा शरीफ यूनिवर्सिटी का है। और इसे जताने के लिए ही अरागची ने उसे एमआईटी लिखा।
इस पोस्ट में उन्होंने तारों (प्लीअडीज) की बात की। शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने की अमेरिकी मंशा पर कमेंट करते हुए अब्बास अरागची ने 6 अप्रैल को लिखा, “1400 साल पहले पैगंबर मोहम्मद ने कहा था, अगर ज्ञान आसमान में तारों तक चला जाए, तो भी ईरानी उसे हासिल कर लेंगे।” वेस्टर्न एस्ट्रोनॉमी में प्लीअडीज उन तारों के समूह को कहते हैं जिन्हें ज्योतिष में कृत्तिका नक्षत्र कहते हैं। संस्कृत के श्लोकों से कृत्तिका जब हिंदी में आई तो कृतिका हो गई।
ईरान और अरब की लाइफलाइन कृतिका
जब घड़ी नहीं थी, कंपास नहीं बना था, हजारों सालों तक ईरान और अरब के लोग तारों के समूह कृतिका को देखते थे। यही तारे समय बताते थे, दिशा दिखाते थे और मौसम का पूर्वानुमान देते थे। रात का कौन-सा पहर चल रहा है, सुबह होने में कितना समय बाकी है, आसमान में इसके पोजिशन को देखकर लोग अंदाजा लगा लेते थे। ठंड के दिनों में, यानी अक्टूबर से मार्च में यह सबसे ज्यादा चमकता हुआ दिखता, बसंत आते मद्धम पड़ने लगता, गर्मियों में मुश्किल से दिखता और रात में कम समय के लिए ही नजर आता- यह सब लोक-ज्ञान में था। बारिश कब होगी, कब तेज गर्मी पड़ेगी, इसका अंदाजा होने से कब, कौन-सी फसल बोनी है, काटनी है, वे प्लान कर पाते थे। समुद्री यात्रियों और रेगिस्तान में कारवां को यह रास्ता दिखाता था। आज भी कृतिकाएं आसमान में वहीं हैं, समय और दिशा का अंदाजा भी वैसे ही देंगी; पर हमारे पास अब इन सबके लिए स्मार्ट वॉच, वेदर ऐप और गूगल मैप आ चुका है।
ज्योतिष में कृतिका नक्षत्र- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 27 नक्षत्रों में कृतिका नक्षत्र मेष राशि और वृषभ राशि के मिलन बिंदु पर है। पंचांग, जन्म कुंडली, मुहुर्त, भविष्यफल और अनुष्ठान कार्यों का समय पता करने के लिए की जाने वाली ज्योतिष-गणना में अश्विनी और भरनी के बाद तीसरा नक्षत्र कृतिका है। वेदांग ज्योतिष और विष्णु पुराण में कृतिका को नक्षत्रों में प्रमुख स्थान दिया गया है। तैत्तरीय ब्राह्मण में कृतिका को ‘देव-नक्षत्रों’ में प्रथम बताया गया है (1.5.2.7)। अथर्ववेद में नक्षत्रों में पहला आह्वान कृतिका का किया गया है (कांड 19, सूक्त 7, श्लोक 2 )। इसकी ज्योतिषीय स्थिति 26°40′ मेष से 10° वृषभ तक है।
कृतिका की पौराणिक कहानियां- कृतिका (संस्कृत में कृत्तिका) केवल तारे नहीं हैं, बल्कि संस्कृत श्लोकों में जीवित अनादि कथा हैं, जो अग्नि, मातृत्व और दिव्यता को एक साथ जोड़ती हैं। हिंदू पौराणिक परंपरा में कृतिका एक नहीं, छह दिव्य स्त्रियां हैं। इन्हें देवताओं की मातृशक्ति माना गया है। पुराणों में देवताओं और असुरों के बीच होने वाली लड़ाइयों की कई कहानियां हैं। स्कंद पुराण और शिव पुराण में ऐसे ही एक भीषण युद्ध का वर्णन है- असुरों से पार पाने के लिए देवताओं को एक ऐसे योद्धा की आवश्यकता थी, जो अद्वितीय हो, जिसमें दिव्यता और शक्ति दोनों का संगम हो। ऐसे में भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा से एक तेजस्वी अग्नि उत्पन्न हुई। यह अग्नि इतनी प्रचंड थी कि उसे संभालना किसी के लिए आसान नहीं था। तब उस दिव्य तेज को छह कृतिकाओं ने अपने स्नेह और तप से धारण किया। कृतिकाओं ने एकसाथ मिलकर बालक कार्तिकेय का पालन पोषण किया। कार्तिकेय के छह मुख (षण्मुख) इन्हीं छह कृतिकाओं के मातृत्व और वात्सल्य का बोध कराते हैं।
जब कृतिकाओं का कार्य पूर्ण हुआ, तो देवताओं ने उन्हें आकाश में स्थान दिया। आज भी वे तारों के रूप में चमकती हैं, एक साथ, एक समूह में, जैसे सदा अपने पुत्र पर दृष्टि रखे हो। इसी परंपरा में कृतिका को पालन-पोषण, साहस और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। आसमान में छह माताओं का अमर प्रेम, जो युगों से चमक रहा है।
महाभारत में कृतिका की कहानी- महाभारत के वनपर्व और शल्यपर्व में कृतिकाओं का जिक्र है, मगर कहानी कुछ और है। यहां कार्तिकेय को शिव का पुत्र नहीं, बल्कि अग्नि और स्वाहा का पुत्र बताया गया है। स्वाहा, जो राजा दक्ष की पुत्री थीं, अग्नि के प्रति आकर्षित थीं। स्वाहा अग्नि की पत्नी नहीं थीं, उनका मिलन प्रेमवश होता है और एक दिव्य बालक का जन्म होता है।
छह कृतिकायें उस दिव्य पुत्र की मां बन जाती हैं और उन्हें नाम देती हैं कार्तिकेय। कुछ कहानियों में कृतिकायें सप्तऋषियों की पत्नियां मानी गई हैं। फिर यहां संख्या को लेकर भ्रम पैदा होता है। दरअसल उन कहानियों में ऋषि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधति को अलग रखा गया है और सिर्फ छह कृतिकाओं का वर्णन है।
पर्शियन एस्ट्रोनॉमी में कृतिका- पर्शियन स्कॉलर अल बिरूनी ने किताब-उल-हिन्द में लिखा है कि कृतिका नक्षत्र फारस और अरब में लोगों को समय, दिशा और मौसम बताता था। पर्शियन एस्ट्रोनॉमी में इसका आकाशीय पोजीशन वही है जो भारतीय ज्योतिष में है। आकाश में जब कृतिकायें दिखती तो इसका संकेत होता- बारिश, उर्वरता, समृद्धि और खुशहाली के दिन। और जब गायब होती तो गर्मी, सूखा का समय। इस तारा समूह को अरबी भाषा में ‘थुरैया’ कहते हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक सैटेलाइट मोबाइल कंपनी है, जिसने अपने फोन का नाम ही थुरैया रखा है। हिंदी, उर्दू में यही नाम सुरैया बन गया। इसे परवीन भी कहते हैं। 9वीं सदी के अरबी विद्वान इब्न क़ुतैबा अपनी किताब किताब-अल-अनवा में लिखते हैं- थुरैया उगे, तो गर्मी टूटे। कुतैबा ज्यादा समय अरब में रहे, पर मूल रूप से पर्शिया (फारस) से आते थे। आज का ईरान ही तब पर्शिया और फारस कहलाता था।
ग्रीक माइथोलॉजी में 7 सिस्टर्स-कहानी है कि समुद्र-देवता एटलस और अप्सरा प्लीयोनी की 7 बेटियां थीं। एक दिन महान शिकारी ओरायन ने इन बहनों को देखा और उनका पीछा करने लगा। सातों बहनें भयभीत होकर भागीं, मगर वे धरती पर कहीं सुरक्षित नहीं थीं। तब उन्होंने देवताओं से प्रार्थना की। उनकी पुकार सुनकर देवताओं के राजा ज़्यूस ने उन्हें आकाश में स्थान दे दिया और वे तारे बन गईं। हमेशा के लिए ओरायन से दूर और आकाश में सुरक्षित। कहानी सात बहनों की है, पर इस तारा समूह में 6 तारे ही चमकते हुए क्यों दिखाई देते हैं? इसकी कहानी है कि इन सात बहनों में से एक मेरोपे ने मनुष्य से प्रेम किया और उसका तेज खत्म हो गया।
गैलीलियो की 6 नहीं, 36 कृतिकायें- 1610 में प्रकाशित अपनी किताब सिडेरियस नन्सियस में गैलीलियो लिखते हैं, “हमने वृषभ राशि (टॉरस) के छह तारों का चित्र प्रस्तुत किया है, जिन्हें कृतिका (प्लीअडीज़) कहा जाता है। हम छह कहते हैं, क्योंकि सातवां तारा अक्सर दिखाई नहीं देता। इनके आसपास और भी 40 से अधिक तारे मौजूद हैं, और इनमें से कोई भी कृतिकाओं से आधे डिग्री से अधिक दूर नहीं है। इनमें से 36 तारों का रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है।” उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि छह कृतिकाओं के अलावा जिन 30 तारों को चित्र में दिखाया गया है, वे इनविजिबल हैं, सामान्य आंखों से नहीं दिखते। उन्होंने इसे टेलीस्कोप से देखा। मगर टेलीस्कोप से महीनों ऑब्जर्व करने के बाद भी उन्होंने सिर्फ 36 तारों का डेटा रिकॉर्ड किया, जबकि 40 से अधिक तारे दिखे थे। मतलब साफ था कि 36 के अलावा बाकी के तारे स्पष्ट नहीं दिख रहे थे। यह भी एक इनफॉर्मेशन था कि 40 से अधिक कितने तारे हैं पता नहीं। ये सौ, हजार कुछ भी हो सकते हैं।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
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न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
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करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
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पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
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व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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